रामलीला मंच गोपेश्वर द्वारा रामलीला मंचन का अष्टम दिवस मुख्य आकर्षण बाली सुग्रीव युद्ध
Автор: v bhatt vlogs
Загружено: 2024-11-12
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बालि और सुग्रीव के जन्म के विषय में एक रोचक प्रसंग है जिसका उल्लेखन भगवान श्री रामचन्द्र श्री हनुमान द्वारा पूछने पर करते हैं इस प्रसंग का वर्णन मूल वाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड में है और उस प्रसंग के अनुसार बालि और सुग्रीव तीन पुरुषों से उत्पन्न हुए थे। रामायण के उत्तर काण्ड के अनुसार ऋक्षराज नामक एक वानर था जो अपने बल के मद में चूर रहता था। एक दिन वह बल के मद में चूर होकर एक सरोवर पर स्नान करने गया। कहतें हैं कि वह सरोवर परमपिता ब्रह्मा के स्वेद अर्थात् पसीने से बना था और उस तालाब पर श्राप था कि को भी पुरुष उस सरोवर में स्नान करेगा वह सुन्दर स्त्री और जो स्त्री उसमें स्नान करेगी वह पुरुष बन जाएगी। ऋक्षराज अपने बल के मद में चूर था उसे इस बात का ज्ञात नहीं था। वह जैसे ही उस तालाब में स्नान करने के लिए गया तो वह सुन्दर स्त्री बन गया। अपने घर को जाते हुए उसे मार्ग में देवराज इन्द्र मिल गए। इन्द्र जो इस बात से अज्ञात थे कि वो कोई स्त्री नहीं अपितु एक पुरुष है। इन्द्र उसके सौंदर्य पर मोहित हो गए और उनके मन में काम भाव जागा। उन्होंने स्त्री रूपी ऋक्षराज के साथ सम्भोग किया और कालान्तर में ऋक्षराज ने एक बालक को जन्म दिया जिसके सुन्दर केश अर्थात् बाल होने के कारण उसका नाम बालि रखा गया। ऋक्षराज ने अपने पुत्र बालि को महर्षि गौतम और उनकी पत्नी अहल्या को सौंप दिया। ऋक्षराज के उस सुन्दर स्त्री रूप को देखकर भगवान सूर्य भी उस पर मोहित हो गए। सूर्यदेव ने भी ऋक्षराज के साथ सम्भोग किया और कालान्तर में ऋक्षराज ने सुन्दर ग्रीवा अर्थात् गर्दन वाले बालक को जन्म दिया जिसका नाम सुग्रीव रखा गया। सुग्रीव को भी ऋक्षराज ने गौतम ऋषि और अहल्या को सौंप दिया।राम के यह आश्वासन देने पर कि राम स्वयं वालि का वध करेंगे, सुग्रीव ने वालि को ललकारा। वालि ललकार सुनकर बाहर आया। दोनों में घमासान युद्ध हुआ, परंतु क्योंकि दोनो भाइयों की मुख तथा देह रचना समान थी, इसलिए राम ने असमंजस के कारण अपना बाण नहीं चलाया। अंततः वालि ने सुग्रीव को बुरी तरह परास्त करके दूर खदेड़ दिया।
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