कहानी क्षणों का मूल्य सुषमा शर्मा
Автор: Garbhanal Patrika
Загружено: 2025-12-26
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क्या दूसरों की खुशी आपकी उदासी का कारण है? | क्षणों का मूल्य | Motivational Story
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और सोशल मीडिया के दौर में, हम अक्सर अपनी खुशियाँ दूसरों के 'स्टेटस' और 'पोस्ट' में ढूँढते हैं। "क्षणों का मूल्य" सविता जी की कहानी है, जो सब कुछ होते हुए भी एक अनजाने अवसाद में थीं। उनका संघर्ष किसी बाहरी दुश्मन से नहीं, बल्कि 'तुलना' के उस ज़हर से था जो उनके हर दिन के 1,440 मिनटों को निगल रहा था।
सविता जी को एक साधारण सफाई कर्मचारी, पार्वती से जीवन का सबसे बड़ा सबक मिलता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारे दिन का हर एक मिनट एक खाली कैनवास है—हम चाहें तो इसे दूसरों से तुलना करके काला कर दें, या किसी की मदद और छोटी-छोटी खुशियों से रंगीन बना दें।
सुनिए सविता जी के बदलाव की यह मर्मस्पर्शी कहानी, जो आपको अपने समय और जीवन की कीमत नए सिरे से समझाएगी।
लेखिका: सुषमा शर्मा
प्रस्तुति: गर्भनाल पत्रिका
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