संतमत क्या है |
Автор: Gurudev Bhakti Sadhna
Загружено: 2025-09-16
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संतमत क्या है | #संतमत | Santmat Kya Hai | जानिए संतमत की परिभाषा | महर्षि मेंही सत्संग 2025
🎤 एल्बम: संतमत सत्संग
🧘 वाचक / कलाकार: ब्रह्मचार्य स्वामी नवल बाबा
📚 विषय: संतमत क्या है
🎥 रिकॉर्डिंग व एडिटिंग: चन्द्रमोहन गुप्ता
📸 कैमरा: सी. एम. गुप्ता
🏡 संगठन: स्वामी अनुभव बाबा
📞 कॉल समय: प्रातः 08:00 से सायं 06:00 बजे तक
📱 संपर्क: 7631876416
©️ कॉपीराइट मालिक: गुरुदेव भक्ति साधना
संतमत भारतीय उपमहाद्वीप का एक आध्यात्मिक मार्ग है, जिसका अर्थ है "संतों की शिक्षाएँ" या "सत्य का मार्ग". यह एक रहस्यवादी परंपरा है जो ध्यान (नादानुसंधान या सुरत शब्द योग) और सेवा के माध्यम से ईश्वर को पाने पर केंद्रित है. संतमत का पालन करने वाले संत (सत्य को जानने वाले) गुरुओं के मार्गदर्शन में प्रेम, एकता और नैतिक जीवन जीने का प्रयास करते हैं.
संतमत के सिद्धांत
नैतिक जीवन: इस मत में झूठ, नशा, व्यभिचार, हिंसा और चोरी जैसे निषिद्ध कर्मों से बचने पर बल दिया जाता है.
सेवा (निस्वार्थ सेवा): इसमें गुरु, साधकों और संगठन के प्रति मानसिक, शारीरिक या वित्तीय सेवा करना शामिल है.
प्रेम और एकता: संतमत सभी के प्रति प्रेम और समानता पर जोर देता है.
आध्यात्मिक ध्यान (नादानुसंधान/सुरत शब्द योग): यह आत्मा की मुक्ति का विज्ञान है, जिसमें ध्यान द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान और उच्च अनुभव प्राप्त किए जाते हैं.
गुरु का महत्व: एक सच्चा संत या गुरु मार्गदर्शन और शिक्षाओं के लिए आवश्यक है.
संतमत का इतिहास और विकास
संतमत की जड़ें बहुत प्राचीन हैं, जो उपनिषदों के ज्ञान से प्रभावित हैं.
13वीं-17वीं शताब्दी के दौरान, कबीर साहब, गुरु नानक साहब और अन्य रहस्यवादी संतों ने इस ज्ञान को आम जनता तक पहुँचाया.
आज, महर्षि मेंहीं परमहंस, बाबा देवी साहब और स्वामी शिवदयाल सिंह (जिन्हें राधास्वामी के नाम से भी जाना जाता है) जैसे संतों ने इस परंपरा का प्रचार किया है.
संक्षेप में
संतमत एक ऐसा आध्यात्मिक मार्ग है जो नैतिक जीवन, ध्यान और सेवा के माध्यम से आत्मा को परम सत्य और शांति से जोड़ता है. यह पूर्व के विभिन्न रहस्यों और शिक्षाओं का सार है.
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