21.3.1981 avyakt mahavakya/"सच्ची होली कैसे मनायें?"/in sindhi
Автор: avyakt mahavakya in sindhi brahma kumaris
Загружено: 2025-08-05
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🌟 जब होली अर्थात् पास्ट इज पास्ट कर बाप के होलिए तब खुशी की पिचकारी लगाते हो।👉तो आपकी पिचकारी से कितनी धारायें निकलती हैं?👉आपकी खुशी की पिचकारी मनुष्य को कितना परिवर्त्तन कर देव आत्मा मना देती है। एक धारा - ‘‘मैं एक श्रेष्ठ आत्मा हूँ'', यह खुशी की धारा है। मैं विश्व के मालिक का बालक हूँ। मैं सृष्टि के आदि मध्य अन्त का नालेजफुल हूँ। ऊंचे ते ऊंचे बाप के साथ श्रेष्ठ मंच पर मेरा हीरो पार्ट है। इसी प्रकार कितनी खुशी की पाइंटस की धारायें आपकी पिचकारी में हैं।👉दूसरी सर्व प्राप्तियों के धाराओं की पिचकारी। जैसे अतीन्द्रिय सुख। आत्मा और परमात्मा के मिलन का रूहानी प्रेम। ऐसे और भी सोचो। 👉तीसरी पिचकारी,सर्व शक्तियों की पिचकारी।👉अच्छा चौथी पिचकारी ज्ञान की मूल पाइंटस।
🌟गोपी-वल्लभ,गोप गोपियों से एक दिन होली नहीं खेलते लेकिन संगमयुग का हर दिन होली डे है। संगम पर होली और सतयुग मे होगी हाली डे।👉अभी तो मेहनत ही मुहब्बत के कारण हाली डे की अनुभूति कराती है।
👉संगमयुग की जितनी मेहनत उतनी फ्रीडम है। क्योंकि बुद्धि और शरीर बिजी रहते उतना व्यर्थ संकल्पों से फ्री रहते हैं।👉इसलिए कहा कि संगम पर मेहनत ही हाली डे है।
🌟यादगार की होली में भी मनाने के दिन देवताओं के रूप साँग के रूप में बनाते हैं। लेकिन उसमें भी विशेष मस्तक पर लाइट जलाते हैं। यह आपका यादगार है। जब मस्तक की ज्योति जगती तो देवता बन जाते हो। बाप के हो लिए तो देवता बन जाते हो।👉बड़े-बड़े लोग एक महामूर्ख सम्मेलन भी करते हैं। यह भी राइट है। क्योंकि जब बाप आते हैं तो बड़े-बडे लोग महामूर्ख ही बन जाते हैं, जितने बड़े उतने ही मूर्ख बनते।👉जो बाप को ही नहीं जान सकते तो महामूर्ख हुए ना! देखो बड़े-बड़े नेतायें जानते हैं?तो महामूर्ख हुए ना। यह भी अपनी कल्प पहले की महामूर्खता की यादगार मनाते हैं। सारा उल्टा कार्य करते हैं।
🌟बाप कहते मेरे को जानो,वह कहते बाप हैं ही नहीं। तो उल्टे हुए ना! आप कहते हो बाप आया है,वह कहते हो ही नहीं सकता। तो उल्टा कार्य करते हैं ना। ऐसे तो बहुत कुछ विस्तार कर लिया है। लेकिन सार है बाप और बच्चों के मंगल मिलन का यादगार। संगमयुग ही मंगल मिलन का युग है।
🌟ऐसे होली कर होली के गीत गाने वाले,सदा भिन्न-भिन्न पिचकारियों द्वारा आत्मा की चोली रंगने वाले,सदा बाप से मंगल मिलन मनाने वाले,ब्राह्मण सो देवता बनने वाले,बेगमपुर के मालिकों को बापदादा का याद प्यार और नमस्ते।
🌟सदा ही ऐसे हँसते नाचते रहो। लेकिन अविनाशी। बापदादा बच्चों को बहलते हुए देख यही वरदान देते कि ‘अविनाशी भव'। टांगे तो थक जायेंगे लेकिन बुद्धि से खुशी में नाचते रहेंगे।
👉अव्यक्त वतन वासी बन फरिश्ते की ड्रेस में नाचते रहेंगे तो अविनाशी और निरंतर कर सकेंगे।
🌟अभी तो और भी ज्यादा दु:ख की हाहाकार बढ़ेगी। ऐसे अनुभव करेंगे जैसे सुख की एक जरा-सी झलक भी नहीं दिखाई देती। यह सुख के साधन सब उन्हों को दु:ख के साधन अनुभव होने लगेंगे। ऐसे टाइम पर सिर्फ एक ही बाप और बाप के बच्चों का सहारा उन्हों को दिखाई देगा। सारे देश में अन्धकार के बीच में एक ही लाइट हाउस दिखाई देगा। यह धीरे-धीरे अति में जल्दी-जल्दी जाता रहेगा। तो ऐसे समय पर लाइट और माइट देने के अभ्यासी आत्मायें चाहिए।👉क्योंकि अमेरिका में जितने ज्यादा वैभव है,जितना बड़ा स्थान है उतना ही बड़ा दु:ख का अनुभव भी करेंगे। तो विनाश की तैयारियाँ चल रही हैं ना!👉विनाश के निमित्त आत्माओं के साथ-साथ आप स्थापना करने वाली आत्मायें भी अपना झण्डा बुलल्द करेंगी।👉तो स्थापना के कार्य में विशेष आत्मा को कौन लायेगा? अमेरिका। विशेष अच्छा- अच्छा कहते,अच्छा बनाते जाओ।
🌟धार्मिक नेताओ को महान-महान कहते हुए अपनी महानता दिखानी है अगर पहले उनको कहेंगे आप तो कुछ नहीं हैं,आप रांग कर रहे हैं,तो वह तुम्हारी सुनेंगे भी नहीं। इसलिए पहले महिमा करो।👉जैसे मुरली में सुनते हो ना चूहा क्या करता है? पहले फूंक देता फिर काटता है, ऐसे करो।👉अच्छा- अच्छा कहते,अच्छा बनाते जाओ। तो समझा आपको कौन-सा कार्य करना है! यह भी आपके मैसेन्जर बन जायेंगे। इन्हों का आवाज तो बड़ा होता है ना! माइक बड़े होते हैं, इसलिए ऐसे-ऐसे को सम्पर्क में लाओ। जिसका नाम अच्छा हो, बड़ा हो। आप उन्हों द्वारा अपना बड़ा कार्य निकाल सकते हो।👉 उन्हों को इस कार्य में सहयोगी बनाओ। उनके पास कोई अनुभवी परिवार ले जाओ तो उसके प्रैक्टिकल लाइफ का प्रभाव उन पर ज्यादा पड़ेगा। क्योंकि वह भी प्रूफ देखने चाहते हैं कि यह क्या करते हैं।
🌟‘‘सी फादर'' इस मंत्र को सदा सामने रखते हुए चढ़ती कला में चलते चलो। जैसे फादर एकरस है तो फालो फादर करने वाले भी एकरस रहेंगे।
🌟फारेनर्स का अपना भाग्य, भारत वालों का अपना भाग्य। 👉विदेश की महिमा लास्ट सो फास्ट के हिसाब से है लेकिन जो हैं ही आदि में वह आदि में ही रहेंगे।👉भारत वालों ने भगवान को अपना बनाया है,और उन्हों को बना बनाया भगवान मिला है। अगर भारतवासी बाप को न पहचानते तो उन्हों को पहचान कौन देता? बाप को प्रत्यक्ष करने के निमित्त तो फिर भी पहले भारत वाले हैं। गुप्त से प्रत्यक्ष पहले भारत वालों ने किया, फिर उन्होंने माना।
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