केनोपनिषद् — चतुर्थ खण्ड (ब्रह्म की पहचान, विनम्रता और मोक्ष)
Автор: Chetna Samvad – Ramesh Chauhan
Загружено: 2025-12-29
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इस एपिसोड में प्रस्तुत है एकादशोपनिषद प्रसाद के अंतर्गत
केनोपनिषद् का चतुर्थ खण्ड,
जो ब्रह्म की सर्वोच्चता और देवताओं द्वारा उसके वास्तविक स्वरूप की पहचान को स्पष्ट करता है। कथा में बताया गया है कि अग्नि और वायु जैसे शक्तिशाली देवता भी ब्रह्म की असीम शक्ति को समझने में असमर्थ रहते हैं। परंतु इंद्र, जब अहंकार का त्याग कर विनम्रता के साथ सत्य की खोज करता है, तो देवी उमा के मार्गदर्शन से उस परम सत्य का साक्षात्कार करता है जो समस्त विजय और सामर्थ्य का मूल स्रोत है। यह खण्ड हमें सिखाता है कि आत्मज्ञान की यात्रा में तप, संयम और सत्य अनिवार्य स्तंभ हैं। एकाग्र मन और दृढ़ संकल्प से की गई ब्रह्म-उपासना साधक को पापों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाती है।
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