Swarnawali | Humein aur maya se tripti
Автор: Guru And I
Загружено: 2025-08-02
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ॐ
हमें और माया से तृप्ति ना होती,
गुरु जो ना होते, प्रभु जो ना होते
हर वचन तुम्हारा सुनेंगे ख़ुशी से,
पड़ेंगे ना कभी भी लोभ के पीछे
मैं माया के जाल से छूट ना पाती,
गुरु जो ना होते, प्रभु जो ना होते ।।
गुरु के ही प्रेम से खींचे चले आये हम तो,
किसी की फ़िकर नहीं, भूले है ग़म को
प्रेम की वर्षा बरसती ना होती
गुरु जो ना होते, प्रभु जो ना होते ।।
गुरु की ही वाणी ने, हमें है सम्भाला,
प्यार के आँचल से गुरु ने सहलाया
मोह और माया भी विसरते ना होते,
गुरु जो ना होते, प्रभु जो ना होते ।।
हमें क्या पता है, हमें क्या हुआ है
गुरु की ही वाणी का ये तो नशा है
सच्चाई से भी हम अनजान होते
गुरु जो ना होते, प्रभु जो ना होते ।।
हमें जो तुम्हारा सहारा ना मिलता,
भँवर में ही रहते, किनारा ना मिलता
सागर से मोटी को ढूँढ कैसे पाते,
गुरु जो ना होते, प्रभु जो ना होते ।।
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