25.3.1981 avyakt mahavakya/"महानता का आधार संकल्प, बोल और कर्म की चेकिंग"/in sindhi
Автор: avyakt mahavakya in sindhi brahma kumaris
Загружено: 2025-08-15
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🌟 मधुबन निवासी अर्थात् महान पावन धरनी निवासी। इस धरनी पर आने वालों का भी महान पार्ट है तो सोचो रहने वालों का कितना महान पार्ट है!👉जब आने वाले भी अपने को भाग्यशाली अनुभव करते हैं, अनेक अनुभवों की स्वयं में अनुभूति करते हैं तो रहने वाले का अनुभव क्या होगा! जो रहते ही ज्ञान सागर में हैं, ऐसी आत्मायें कितनी श्रेष्ठ हैं!👉जैसे टाप का स्थान है, ऐसे ही स्थिति भी टाप की रहती है। नीचे तो नहीं आते हो?🌟मधुबन निवासियों को कितने प्रकार की लिफ्ट की गिफ्ट है, उसको जानते हो? कभी गिनती की है? वा इतनी है जो गिनती नहीं कर सकते हो?👉 मधुबन की महिमा के गीत सभी गाते हैं। लेकिन मधुबन निवासी वह गीत गाते हैं? मधुबन वासियों का चित्र दूर-दूर रहने वाले भी अपने दिल में कितना श्रेष्ठ चित्र खींचते हैं, यह जानते हो? ऐसा चित्र चैतन्य में अपना तैयार किया है?👉जैसे स्थूल पहाड़ी है वैसे सदा ऊंची स्टेज की पहाड़ी पर रहते हो? ऐसी ऊंची स्टेज जहाँ पुरानी दुनिया के वातावरण का कोई प्रभाव आ नहीं सकता।👉मधुबन को डबल लकीर है। एक तो मधुबन निवासी मधुबन की लकीर के अन्दर हैं। और दूसरा सदा श्रीमत की लकीर के अन्दर हैं। तो डबल लकीर के अन्दर हो।👉 डबल लकीर के अन्दर रहने वालों की स्टेज कितनी श्रेष्ठ होगी।
🌟दिल तख्तनशीन तो सब हैं लेकिन मधुबन निवासी चुल्ह पर भी हैं तो दिल पर भी हैं। डबल हो गया ना। सबसे ताजा माल मधुबन निवासियों को मिलता है।👉सबसे बढ़िया अनुभवों की पिकनिक मधुबन निवासी करते हैं। सबसे ज्यादा मिलन महफिल मधुबन निवासी करते हैं। सबसे ज्यादा चारों ओर के समाचारों के नालेजफुल भी मधुबन निवासी हैं। मधुबन निवासियों से मिलने सभी को आना पड़ता है।👉 तो इतना श्रेष्ठ भाग्य,और वर्णन कौन करता है? बाप बच्चों का भाग्य वर्णन कर रहे हैं। मधुबन निवासियों का कितना श्रेष्ठ भाग्य है! अगर एक बात भी सदा याद रखो तो नीचे कभी आ नहीं सकते।🌟मधुबन निवासियों के लिए सिर्फ एक ही बात स्मृति में रख समर्थ बनने की है। वह कौन सी? जिस एक बात में सब समया हुआ है।
👉जो भी संकल्प करो, बोल बोलो, कर्म करो, सम्बन्ध वा सम्पर्क में आओ, सिर्फ एक चेकिंग करो कि यह सब बाप समान हैं? जो मेरा संकल्प वह बाप का संकल्प है? मेरा बोल बाप का बोल है? क्योंकि सबकी यही प्रतिज्ञा है बाप से, ‘‘कि जो बाप से सुना है वही सुनायेंगे। जो बाप सुनायेंगे वहीं सुनेंगे। जो बाप ने सोच के लिए दिया है वहीं सोचेंगे। यह तो सबका वायदा है ना? जब यह वायदा है तो सिर्फ यह चेकिंग करो।👉पहले मिलाओ फिर प्रैक्टिकल में लाओ👉आप सबका संकल्प भी बुद्धि का भोजन है। बोल भी मुख का भोजन ही है। कर्म - हाथों का, पाँव का भोजन है।
🌟चेकिंग की मशीनरी तो है ना। अभ्यास ही मशीनरी है।
🌟 जैसे अथक हो वैसे ही सदा एकरस। 🌟मधुबन है सबको लाइट और माइट देने वाला। अगर लाइट-हाउस, माइट-हाउस ही हिलता रहेगा तो दूसरों का क्या हाल होगा!👉 मधुबन निवासियों का सब वायुमण्डल बहुत जल्दी चारों ओर फैलता है। 👉यहाँ की छोटी बात भी बाहर बड़े रूप में पहुँचती है। क्योंकि बड़े आदमी हो ना। सदा छत्रछाया में रहने वाले।👉 36 प्रकार के भोजन भी मधुबन वालों को बार-बार मिलते हैं। तो 36 गुण भी तो धारण करने पड़ेंगे। हरेक मधुबन निवासी को पवित्रता की लाइट के ताजधारी तो होना ही है। लेकिन डबल ताज। एक गुणों का ताज, दूसरा पवित्रता का ताज जिस ताज में कम से कम 36 हीरे तो होने ही चाहिए।
🌟बापदादा निरंतर बच्चों से मिलन मनाते रहते हैं और मनाते रहेंगे। अनेक बच्चे होते भी हरेक बच्चे के साथ बाप मिलन मनाते ही हैं। क्योंकि शरीर के बन्धन से मुक्त बाप औरा दादा दोनों एक सेकेण्ड के अन्दर अनेकों को भासना दे सकते हैं।
🌟दीदी जी के साथ रायल फैमली बन चुकी है या अभी बन रही है? राज्य कारोबार चलाने वाले निकल चुके हैं या अभी निकलने हैं? एक हैं चलानेवाले, एक हैं कारोबार में आनेवाले। जो तख्त नशीन होंगे वह राज्य चलाने वाले। और जो सम्बन्ध में होंगे वह हैं राज्य कारोबार में आने वाले।👉तख्त वालों के सम्बन्धी तो बनेंगे लेकिन तख्त पर बैठने वालों की तो लिमिट है ना।
👉संगमयुग पर तो दिलतख्त के अधिकारी सबको बाप बनाते हैं। 👉छोटे-छोटे तख्त और राज्य दरबार तो लगेगी लेकिन विश्व-महाराजन के तख्त का विशेष आधार है-हर बात में, हर सब्जेक्ट में बाप को पूरा फालो करने वाले👉तब तख्त भी फालो में मिलेगा👉इसमें भी गुह्य रहस्य है। महाराजा बनना और महारानी बनने का भी रहस्य है।👉कौन-कौन किस राज्य के अधिकारी बनते हैं। किस रेखाओं के हिसाब से बनते हैं,यह भी राज है ना।
👉फालो फादर की भी बड़ी गुह्य गति है। जन्म में फालो फादर। बचपन जीवन में फालो फादर। युवा जीवन में फालो फादर। सेवा की जीवन में फालो फादर। फिर अन्तिम जीवन में फालो फादर। 👉स्थापना के कार्य के साथ और सहयोग में कितने समय से कितने परसेन्ट में फालो किया?👉पालना के कार्य में कहाँ तक फालो किया?👉अपने और औरों के विघ्न विनाशक कार्य में कहाँ तक फालो किया? यह हिसाब की मार्क्स मिलाकर फिर टोटल होता है।
🌟बातों का होना,यह तो संगठन में होगा ही।👉बातों को खत्म करने के लिए ही बाप की याद है।👉 ऐसे नहीं,बातें खत्म हों तब हम आगे बढ़े, हम आगे बढ़ेंगे तो बातें पीछे हो जायेंगी। रास्ता तो वहीं रहेगा लेकिन उसे तय करने वाला आगे बढ़ेगा। साइडसीन नहीं आगे बढ़ेंगी लेकिन देखने वाला आगे बढ़ेगा। तो यह शक्ति है?👉 ‘एक बाप दूसरा न कोई' यह पाठ मंसा वाचा कर्मणा में निरंतर याद है? दूसरा कोई व्यक्ति नहीं है, यह भी एक सब्जेक्ट है, लेकिन कोई वैभव है? कोई विघ्न है? कोई व्यर्थ संकल्प है, अगर एक बाप और दूसरा व्यर्थ संकल्प भी होगा तो दो हो गये ना! संकल्प में भी व्यर्थ न हो, बोल में भी और कुछ नहीं। आत्माओं से सम्पर्क निभाते स्मृति में बाबा।👉माया जानती है, थोड़ा भी चांस आने का मिला तो वह बहुरूप से आयेगी। एक रूप से नहीं। यहाँ से वहाँ से, कोने से, छत से, बहु रूपों से, बहुत तरफ से आ जायेगी। लेकिन परखने वाला, एक बाप दूसरा न कोई इस पाठ के आधार पर उनको दूर से ही नमस्कार करायेगा।
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