hum bhihar se chunav lad rahe hai हम बिहार से चुनाव लड़ रहे है
Автор: CinemaScope
Загружено: 2025-11-15
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इस नाटक में आज से पंद्रह साल पहले हम लगभग एक दशक तक कोरस में बैठे और संगत किए। तब हमारे गुरु Vijay Kumar पटना में रहते थे और मंच आर्ट ग्रुप पटना से संचालित होता था। हम सब उनके सानिध्य में कार्यरत थे। पिछले दिनों इस नाटक का मंचन पटना में हुआ और पुनः इसके कोरस में बैठकर मुझे वही अनुभूति हुई और सबसे आवश्यक बात यह कि रंगमंच की चार पीढ़ियां एक साथ उपस्थित थीं उस दिन। मेरे गुरु विजय कुमार, मैं और फ़िलहाल मेरे सानिध्य में और कुछ मंच मुंबई में विजय भाई के सानिध्य में कार्य कर रहे रंगकर्मी। कुछ मंच पर, कुछ मंच परे तो कुछ दर्शक के रूप में। हां, सबसे पुरानी पीढ़ी के रूप में एक और पीढ़ी भी उस दिन उपस्थित थी Vineet Kumar के रूप में। जो लोग विनीत भाई को जानते हैं वो यह भी भलीभांति जानते हैं कि वो सब कुछ करके चुपचाप मंच के परे चले जाते हैं और ईश्वर की तरह अंतर्ध्यान हो जाते हैं और पुनः तभी प्रकट होते हैं जब कोई संकट की घड़ी आन पड़े या फिर कार्य संपन्न हो जाए।
तो कहा जा सकता है कि पटना रंगमंच पर कार्य करनेवाली रंगमंच की चार पीढ़ी की एक साथ मंच पर और दर्शक दीर्घा में उपस्थित थी और अपनी अपनी भूमिका का निर्वाह कर रही थी। तस्वीर में नौबतपुर के Rajni Kant Kushwaha, Om Prakash Fazal और उनके साथी कलाकार भी हैं कोरस में।
वैसे यह भी अपने आप में एक अद्भुत बात है कि इस एकल अभिनय वाले नाटक में आज तक पूरे देश के अनगिनत रंगकर्मी कोरस में बैठकर संगत कर चुके हैं।
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