SHRI MRITUNJAY STOTRAM - श्री मृत्युंजय स्तोत्रम् -
Автор: Sanatan Sangrah
Загружено: 2026-01-06
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SHRI MRITUNJAY STOTRAM - श्री मृत्युंजय स्तोत्रम् - श्री मृत्युंजय स्तोत्र के जाप से लंबी उम्र, आरोग्य, धन-धान्य, सुख-समृद्धि, भय-नाश, मानसिक शांति और सभी प्रकार के दोषों (कालसर्प, मांगलिक, भूत-प्रेत) से मुक्ति जैसे कई आध्यात्मिक और भौतिक लाभ मिलते हैं, यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और आध्यात्मिक उन्नति कराता है।
श्री मृत्युंजय स्तोत्र - मुख्य लाभ:
1. असाध्य रोगों से मुक्ति, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्राप्ति होती है।
2. मृत्यु भय, अकाल मृत्यु और सभी प्रकार के डर (जैसे दुर्घटना का डर) से रक्षा होती है।
3. कालसर्प दोष, नाड़ी दोष, मांगलिक दोष, भूत-प्रेत दोष और ग्रहों के बुरे प्रभावों से छुटकारा मिलता है।
4. तनाव, चिंता, डिप्रेशन और नकारात्मक विचारों से राहत मिलती है, एकाग्रता बढ़ती है।
5. धन-धान्य में वृद्धि होती है, व्यापार में तरक्की मिलती है और जीवन खुशहाल बनता है।
6. यह एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच बनाता है, जिससे हर बाधा और अनहोनी से बचाव होता है, खासकर यात्रा के दौरान।
7. आत्म-साक्षात्कार, पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
8. घर और वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
श्री मृत्युंजय स्तोत्र - जाप कैसे करें:
• इस मंत्र का जाप नियमित रूप से कम से कम 108 बार (ब्रह्म मुहूर्त में) करने की सलाह दी जाती है।
• पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ जाप करने से विशेष लाभ मिलते हैं।
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