Maharathi Gandivdhari Arjun ( Hindi Rap ) Warrior Of Mahabharat
Автор: AI_BHAJAN
Загружено: 2026-01-01
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Maharathi Gandivdhari Arjun ( Hindi Rap ) Warrior Of Mahabharat
“Gandivdhari Arjun„ is The Sixth Track From The Album - MAHARATHI ..
👏🏻Jai Shri Ram 👏🏻
This Rap Song Is About - “Arjun„ The Best Archer And🩸Warrior Of Mahabharat .
✍🏻LYRICS👇🏻
मैं इंद्रसूत मैं कुंती पुत्र मैं गांडीवधारी अर्जुन हूँ
जिसके रथ को केशव हांके वो गांडीवधारी अर्जुन हूँ
जिसकी ध्वजा हनुमान विराजे गांडीवधारी अर्जुन हूँ
गीता का ज्ञान लिया जिसने मैं गांडीवधारी अर्जुन हूँ
Rap 1
मैं धर्म के पथ चल करता कार्य गुरु है द्रोणाचार्य
अग्नि जिससे थर्र थर्र काँपे पाँचाली का मैं आर्य
निद्रा देवी पर विजय है पाई पलक ना कही झपकाई
भीम और सहदेव से भाई रण में मचादे त्राहि त्राहि
जब भी मेरे बाण चले तब भूमि रक्त स्नान करे
मैंने दुष्टों के प्राण हरे माधव भी मुझपे मान करे
अग्नि देव ने रथ थमाया ध्वजा पे बैठे हनुमान
मैं कितना भाग्यशाली मेरे रथ के सारथी भगवान
मैंने महादेव जो ना पहचाने तो उनसे युद्ध किया
लेकर रण में गीता ज्ञान लो खुदको शुद्ध किया
कौरव सेना काँप उठी रण में उतरा गांडीवधारी
गुरु द्रोण पितामाह या हो कर्ण मैं सबके ऊपर भारी
Dialogue-
बेशक तुम एक महान योद्धा हो कर्ण । किन्तु अर्जुन मेरा शिष्य होकर मुझसे कही अधिक सामृथ्यवान है । कर्ण तुम और मैं क्या । यदि गंगापुत्र भीष्म भी हमारे साथ मिलकर युद्ध करे तब भी हम अर्जुन को परास्त नहीं कर सकते । क्योंकि अर्जुन फिर भी अर्जुन है
Rap 2 -
भाई भीम को विष था पिलाया हमे लाक्षागृह में जलाया
कौरवों ने छोड़ी ना कसर कोई बस केशव ने ही बचाया
श्री कृष्ण बनके गये शांतिदूत तो उनको बंधी बनाया
अरे पाँच गाँव का भी प्रस्ताव दुष्टों ने ठुकराया
महादेव की सौगंध चाहुँ तो इक क्षण में युद्ध निपटा दूँ
पर कैसे भला मैं विजय को दिवयास्त्रों के नाम लगा दूँ
अब सभी मरेंगे बारी बारी मैं एक हूँ लाखों पर भारी
मैंने कर्ण पितामाह साथ हरायें विराट में बनके नारी
मेरा 16 वर्ष का अभिमन्यु इन पापियों ने था घेर मारा
मुझे दूर कर दिया था व्यूह से ताकि ना दे पाऊँ सहारा
मैंने जयद्रथ को काट दिया मैंने कौरवों का मस्तक झुकाया
मैंने पितामाह पर तीर छोड़े उन्हें बाणो की शैय्या पर सुलाया
Dialouge -
मत भड़काओ कर्ण अपने मित्र दुर्योधन को मत भड़काओ । बड़ी बड़ी डींगें हाँकने से युद्ध नहीं लड़े जाते । उस विराट युद्ध में तुम भी थे और मैं भी हम दोनों ने अर्जुन का क्रोध देखा है । अर्जुन के बाणो से स्वयं महाकाल का क्रोध बरसता है ।
Rap 3
मेरे गांडीव की टंकार सुनके अंबर भी हो जाता है मौन
मेरे बाणो का सब लोहा माने संसार जाने अर्जुन है कौन
मेरे मुख पर लाख चन्द्र सा तेज मैं इन्द्रपुत्र गांडीवधारी
मेरे बाणो में वायु सा वेग मैं पांडव श्वेत वस्त्रधारी
गुरु द्रोणाचार्य का श्रेष्ठ शिष्य मुरलीधर मेरे प्रिय सखा
गोविन्द का साथ है मैंने चुना माधव ने पार्थ है नाम रखा
रुक्मणी हरण में माधव का रथ मैंने ही चलाया था
फिर माधव ने ये कर्ज मेरा महाभारत रण में चुकाया था
अधर्म का साथ दिया तुमने है अंगराज मेरे ज्येष्ठ भ्राता
तुम धर्म के पथ पर काश होते मैं तुमको ना युँह मार पाता
तुम वचनबद्ध ग़र ना होते और मेरे विरोधी ना होते
मैं लिख कर देता हूँ केशव भी तुम्हारे सारथी होते
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