जैसलमेर का कुलधरा कैसे बन गया भूतों का गांव ?
Автор: Jaisalmer Ki Galiyan
Загружено: 2021-07-06
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कुलधरा, राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक गांव है, जिसे "भूतों का गांव" कहा जाता है। इस गांव का इतिहास और इसके अचानक वीरान हो जाने की कहानी सदियों से लोगों को आकर्षित करती आई है।
कुलधरा का इतिहास:
कुलधरा गांव 13वीं सदी में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा बसाया गया था, जो इस क्षेत्र के प्रमुख और समृद्ध समुदाय थे। यह गांव अपनी उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली और खेती की उत्कृष्टता के लिए जाना जाता था। पालीवाल ब्राह्मण अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करते हुए यहां शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करते थे।
वीरान होने की कहानी:
18वीं सदी के अंत में, जैसलमेर के दीवान सालिम सिंह ने कुलधरा गांव पर अपनी बुरी नज़र डाल दी। कहा जाता है कि दीवान की नजर गांव की एक खूबसूरत ब्राह्मण लड़की पर पड़ गई थी, और उसने उसके साथ जबरन शादी करने की ठानी। दीवान की इस मांग से पालीवाल ब्राह्मणों में आक्रोश फैल गया, क्योंकि यह उनकी प्रतिष्ठा और सम्मान के खिलाफ था।
पालीवाल ब्राह्मणों ने इस स्थिति का सामना करने के लिए एक रात अचानक अपने गांवों को छोड़ने का निर्णय लिया। कहा जाता है कि कुलधरा समेत 84 गांवों के सभी पालीवाल ब्राह्मणों ने एक ही रात में अपने गांवों को छोड़ दिया और कहीं और बस गए। वे अपने साथ सब कुछ ले गए और पीछे कुछ भी नहीं छोड़ा।
भूतों का गांव बनने की कहानी:
कुलधरा को वीरान छोड़ने के साथ ही यह जगह समय के साथ खंडहर में बदल गई। कहा जाता है कि पालीवाल ब्राह्मणों ने इस जगह को छोड़ते समय इसे शाप दिया था कि जो भी यहां बसने की कोशिश करेगा, वह असफल रहेगा। इस शाप के कारण कुलधरा में कोई भी फिर से नहीं बस सका, और धीरे-धीरे यह गांव "भूतों का गांव" कहलाने लगा।
आज कुलधरा एक पर्यटक स्थल बन चुका है, जहां लोग इसके रहस्यमय इतिहास और वीरान खंडहरों को देखने आते हैं। यहां आने वाले कई लोगों ने यहां पर असाधारण गतिविधियों के अनुभव भी बताए हैं, जिससे इसका "भूतों का गांव" होने का रहस्य और भी गहरा हो जाता है।
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