महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित l Mahishasur Mardini Stotram with Hindi Meaning and Lyrics
Автор: Vedic Sangeet (वैदिक संगीत)
Загружено: 2021-04-01
Просмотров: 33926
#MahishasurMardiniStotram #AyiGiriNandiniNanditMedini
#DurgaMaaStuti
#MaaDurgaStuti
#MaaDurgaPath
#NavratriSpecialDurgaStuti
#NavratriSpecialDurgaBhajan
#DurgaMaaStuti
#durgaMaaAarti
#NavratriSpecial
महिषासुर मर्द्नि स्तोत्रम
#अयि #गिरिनन्दिनि #नन्दित #मेदिनि विश्व-विनोदिनि नंदि नुते
गिरिवर विन्ध्य-शिरोऽधि-निवासिनि विष्णु-विलासिनि जिष्णुनुते |
भगवति हे शितिकण्ठ- कुटुम्बिनि भूरि कुटुम्बिनि भूरि कृते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 1 ||
सुरवर-वर्षिणि दुर्धर-धर्षिणि दुर्मुख-मर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवन-पोषिणि शङ्कर-तोषिणि किल्बिष-मोषिणि घोषरते |
दनुज-निरोषिणि दितिसुत-रोषिणि दुर्मद-शोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 2 ||
अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रिय-वासिनि हासरते
शिखरि-शिरोमणि तुङग-हिमालय-शृङ्गनिजालय-मध्यगते |
मधु मधुरे मधु-कैतभ-गञ्जिनि कैतभ-भञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 3 ||
अयि शतखण्ड-विखण्डित-रुण्ड-वितुण्डित-शुण्ड-गजाधिपते
रिपु-गज-गण्ड-विदारण-चण्ड-पराक्रम-शुण्ड-मृगाधिपते |
निज-भुजदण्ड-निपातित-चण्ड-विपातित-मुण्ड-भटाधिपते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 4 ||
अयि रणदुर्मद-शत्रु-वधोदित-दुर्धर-निर्जर-शक्ति-भृते
चतुर-विचार-धुरीण-महाशिव -दूत-कृत-प्रमथाधिपते |
दुरित-दुरीह-दुराशय-दुर्मति-दानव-दूत-कृतान्तमते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 5 ||
अयि शरणागत-वैरिवधूवर वीर वराभय-दायकरे
त्रिभुवनमस्तक-शूल-विरोधि-शिरोधि-कृताऽमल-शूलकरे |
दुमि-दुमि-तामर-दुन्दुभिनाद-महो-मुखरीकृत-दिङ्निकरे
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 6||
अयि निज हुङ्कृति मात्रनिराकृत-धूम्रविलोचन-धूम्रशते
समरविशोषित-शोणितबीज-समुद्भव शोणित-बीजलते |
शिव-शिव-शुम्भ निशुम्भ-महाहव-तर्पित-भूतपिशाच-रते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 7 ||
धनुरनु सङ्ग रणक्षणसङ्ग-परिस्फुर दङ्ग-नटत्कटके
कनक-पिशङ्ग-पृषत्क-निषङ्ग-रसद्भट शृङ्ग-हताबटुके |
कृत-चतुरङ्ग-बलक्षिति-रङ्ग-घटद्-बहुरङ्ग-रटद्-बटुके
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 8 ||
सुरलल नात तथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
कृत कुकुथः कुकुथो गड दादिक ताल कुतूहल गानरते ।
धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि घोर मृदंग निनाद रते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ 9 ||
जय-जय-जप्य-जये-जय-शब्द-परस्तुति-तत्पर-विश्वनुते
झणझण-झिञ्झिमि-झिङ्कृत-नूपुर-शिञ्जित-मोहित भूतपते |
नटित-नटार्ध-नटीनट-नायक-नाटित नाट् य सुगानरते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 10 ||
अयि सुमनः सुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहर कान्तियुते
श्रित रजनी रजनी रजनी रजनी-रजनीकर-वक्त्रवृते |
सुनयन विभ्रमर भ्रमर-भ्रमर-भ्रमर भ्रमराधिपते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 11 ||
सहित-महाहव-मल्लम तल्लिक-मल्लित-रल्लक-मल्लरते
विरचित वल्लिक-पल्लिक-मल्लिक-झिल्लिक-भिल्लिक-वर्गवृते |
शितकृतफुल्ल समुल्लसिताऽरुण-तल्लज-पल्लव-सल्ललिते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 12 ||
अविरल गण्ड गलन्मद-मेदुर-मत्त मतङ्गज राजपते
त्रिभुवनभूषण भूतकलानिधि रूप-पयोनिधि राजसुते |
अयि सुद तीजन-लालस-मानस-मोहन-मन्मथ राजसुते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 13 ||
कमलदलामल-कोमल-कान्ति-कलाकलिताऽमल-भालतले
सकल विलास कलानिलय क्रम केलिचलत्कल-हंस कुले |
अलिकुल-सङ्कुल-कुवलय मण्डल-मौलिमिलद्-वकुलालिकुले
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 14 ||
कर-मुरली-रव-वीजित-कूजित-लज्जित-कोकिल-मञ्जुमते
मिलित-पुलिन्द-मनोहर-गुञ्जित-रञ्जित-शैल निकुञ्जगते |
निजगणभूत-महाशबरीगण-सद्गुण-सम्भृत-केलितले
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 15 ||
कटितट-पीत-दुकूल-विचित्र-मयूख-तिरस्कृत-चन्द्ररुचे
प्रणतसुरासुर-मौलिमणिस्फुर दंशुल सन्नख चन्द्ररुचे
जित-कनकाचल मौलिमदोर्जित- निर्भरकुञ्जर-कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 16 ॥
विजित-सहस्रकरैक-सहस्रकरैक-सहस्रकरैकनुते
कृत-सुरतारक-सङ्गर-तारक सङ्गर-तारक सूनुसुते |
सुरथ-समाधि-समान-समाधि-समाधिसमाधि-सुजात-रते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 17 ||
पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् |
तव पदमेव परंपद-मित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 18 ||
कनकल सत्कल-सिन्धु जलैर नुषिञ्चति तॆगुण रङ्गभुवं
भजति स किं न शचीकुचकुम्भ-तटीपरि-रम्भ-सुखानुभवं |
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवं
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 19 ||
तव विमलेऽन्दुकलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूत-पुरीन्दुमुखी-सुमुखीभिरसौ-विमुखीक्रियते |
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 20 ||
अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया
भवि तव्य मुमे
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासि रते |
यदुचितमत्र भवत्युररी कुरुता-दुरुता पमपा-कुरुते
जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते || 21 ||
ll इति श्रीशंकराचार्य कृतम् महिषासुरमर्दिनीस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ll
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: