क्यों नटनी के श्राप से उजड़ गया एक राजा का संपूर्ण नगर हारूल by dalip thundu & khajan kanwar
Автор: Dalip thundu
Загружено: 2025-09-30
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sirmour ka itihaas
album credits:
music: prabhu pawar//NP RECORD//
lyrics: dalip thundu
story : arun tomar
singer: dalip thakur & khajan kanwar
spacial thanks to all forest department staoun.
actress: priya thakur nishu thakur ranjana thakur raksha thakur priyanka thakur aanita thakur sneha kanwar rekha devi kiran kamlesh sharma santi devi.
actor: anil, manvik, surat singh, dhanguram, inder singh, pratap singh, jai singh.
सिरमौर का नाम सिरमौर क्यों पड़ा सर का मतलब तालाब मोर का मतलब महल तालाब के नजदीक एक सुंदर महल इसीलिए इसे सिरमौर कहा गया यह बात है 1046 ईसवी पूर्व सूर्यवंशी राजा मदन सिंह सिरमौर के राजा थे एक समय की बात है सिरमौर की नगरी में नटूए आए हुए थे और वह अपने करतब दिखा रहे थे लोग दूर-दूर से उनके खेल देखने को आए लोक खेल देखकर खुश होकर तालियां बजा रहे थे तब राजा ने कहा यह खेल बहुत देख चुके हैं अब यदि कुछ ऐसा करके दिखाओ जिसकी कोई कल्पना भी ना कर सके तो मैं आपको अपना आधा राज्य दे दूंगा तब राजा ने सिरमौर से पौका के लिए एक रास्सा बंधवा दिया और उन नटुए से कहा यदि तुम इस रस्सी पर चलकर गिरी नदी को पार करके पौका पहुंच कर वापस इसी रस्से पर चलकर आओ तो मैं वचन देता हूं कि मैं अपना आधा राज पाठ तुम्हें दे दूंगा एक नटनी ने यह शर्त मंजूर कर ली और फिर राजा से आज्ञा मांग कर वह उसे रस्से पर चलने लगी और जब पौका पहूंच कर वापस आधी गीरी नदी में पहूंची तो राजा को अपना आधा राज्य जाने का डर सताने लगा और उनका अपना दिया हुआ वचन ही उनके गले की फांस बन गया और तब राजा ने अपने दिवान जुझार सिंह को इशारा करके रस्से से काटने को कहा और तब जूझार सिंह ने राजा के इशारे के मुताबिक रास्ता काट दिया और रस्सी करते ही नटनी गीरी नदी के उफनती हुई लहरों में गिर गई
नदी में डूबते वक्त नटनी ने काह की है राजन तुमने मुझे धोखा दिया इसलिए मैं तुम्हें श्राप दे रही हूं कि जिस प्रकार में डूब करके मर रही हूं तुम और तुम्हारे नगर के लोग भी ऐसे ही डूब करके मर जाएं और तब सतोन के पीछे बादल फटा और गीरी नदी में भयंकर बाढ आई और सिरमौर का पूरा नगर जलमग्न हो गया महल और पूरा नगर बाढ़ में पते की तरह बह गया सब कुछ बहने लगा कुछ नहीं बचा नगर में जो मुर्गू थे वह आकाश में उड़ते हुए दिखाई दिए और तब पूरा नगर एक खंडहर में बदल गया कुछ नहीं बचा बचा तो केवल एक नाम सिरमौर जो आज भी है और वह तरासती सिरमौर की छाती पर एक गहरा घाव कर गई सिरमौर के लोग आज भी उसे श्राप का खामियाजा भुगत रहे हैं यही हमारी हारूल में हमने गाया है 🙏🙏🌹🌹🙏🙏
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