Популярное

Музыка Кино и Анимация Автомобили Животные Спорт Путешествия Игры Юмор

Интересные видео

2025 Сериалы Трейлеры Новости Как сделать Видеоуроки Diy своими руками

Топ запросов

смотреть а4 schoolboy runaway турецкий сериал смотреть мультфильмы эдисон
dTub
Скачать

रामचरितमानस मूलपाठ: किष्किन्धाकाण्ड(दोहा:१०-१६)

Автор: RamcharitManas-Kashi

Загружено: 2025-10-07

Просмотров: 1772

Описание:

यरामचरितमानस मूलपाठ: किष्किन्धाकाण्ड प्लेलिस्ट

   • रामचरितमानस मूलपाठ: किष्किन्धाकाण्ड  


दो. राम चरन दृढ़ प्रीति करि बालि कीन्ह तनु त्याग।
सुमन माल जिमि कंठ ते गिरत न जानइ नाग ॥ १० ॥

राम बालि निज धाम पठावा। नगर लोग सब ब्याकुल धावा ॥
नाना बिधि बिलाप कर तारा। छूटे केस न देह सँभारा ॥
तारा बिकल देखि रघुराया । दीन्ह ग्यान हरि लीन्ही माया ॥
छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा ॥
प्रगट सो तनु तव आगें सोवा। जीव नित्य केहि लगि तुम्ह रोवा ॥
उपजा ग्यान चरन तब लागी। लीन्हेसि परम भगति बर मागी ॥
उमा दारु जोषित की नाई। सबहि नचावत रामु गोसाई ॥
तब सुग्रीवहि आयसु दीन्हा। मृतक कर्म बिधिबत सब कीन्हा ॥
राम कहा अनुजहि समुझाई। राज देहु सुग्रीवहि जाई ॥
रघुपति चरन नाइ करि माथा। चले सकल प्रेरित रघुनाथा ॥

दो. लछिमन तुरत बोलाए पुरजन बिप्र समाज।
राजु दीन्ह सुग्रीव कहँ अंगद कहँ जुबराज ॥ ११ ॥

उमा राम सम हित जग माहीं। गुरु पितु मातु बंधु प्रभु नाहीं ॥
सुर नर मुनि सब कै यह रीती। स्वारथ लागि करहिं सब प्रीती ॥
बालि त्रास ब्याकुल दिन राती। तन बहु ब्रन चिंताँ जर छाती ॥
सोइ सुग्रीव कीन्ह कपिराऊ। अति कृपाल रघुबीर सुभाऊ ॥
जानतहुँ अस प्रभु परिहरहीं। काहे न बिपति जाल नर परहीं ॥
पुनि सुग्रीवहि लीन्ह बोलाई। बहु प्रकार नृपनीति सिखाई ॥
कह प्रभु सुनु सुग्रीव हरीसा। पुर न जाउँ दस चारि बरीसा ॥
गत ग्रीषम बरषा रितु आई। रहिहउँ निकट सैल पर छाई ॥
अंगद सहित करहु तुम्ह राजू। संतत हृदय धरेहु मम काजू ॥
जब सुग्रीव भवन फिरि आए। रामु प्रबरषन गिरि पर छाए ॥

दो. प्रथमहिं देवन्ह गिरि गुहा राखेउ रुचिर बनाइ।
राम कृपानिधि कछु दिन बास करहिंगे आइ ॥ १२ ॥

सुंदर बन कुसुमित अति सोभा। गुंजत मधुप निकर मधु लोभा ॥
कंद मूल फल पत्र सुहाए। भए बहुत जब ते प्रभु आए ॥
देखि मनोहर सैल अनूपा। रहे तहँ अनुज सहित सुरभूपा ॥
मधुकर खग मृग तनु धरि देवा। करहिं सिद्ध मुनि प्रभु कै सेवा ॥
मंगलरुप भयउ बन तब ते । कीन्ह निवास रमापति जब ते ॥
फटिक सिला अति सुभ्र सुहाई। सुख आसीन तहाँ द्वौ भाई ॥
कहत अनुज सन कथा अनेका। भगति बिरति नृपनीति बिबेका ॥
बरषा काल मेघ नभ छाए। गरजत लागत परम सुहाए ॥

दो. लछिमन देखु मोर गन नाचत बारिद पैखि।
गृही बिरति रत हरष जस बिष्नु भगत कहुँ देखि ॥ १३ ॥

घन घमंड नभ गरजत घोरा। प्रिया हीन डरपत मन मोरा ॥
दामिनि दमक रह न घन माहीं। खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं ॥
बरषहिं जलद भूमि निअराएँ। जथा नवहिं बुध बिद्या पाएँ ॥
बूँद अघात सहहिं गिरि कैंसें । खल के बचन संत सह जैसें ॥
छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई। जस थोरेहुँ धन खल इतराई ॥
भूमि परत भा ढाबर पानी। जनु जीवहि माया लपटानी ॥
समिटि समिटि जल भरहिं तलावा। जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा ॥
सरिता जल जलनिधि महुँ जाई। होई अचल जिमि जिव हरि पाई ॥

दो. हरित भूमि तृन संकुल समुझि परहिं नहिं पंथ।
जिमि पाखंड बाद तें गुप्त होहिं सदग्रंथ ॥ १४ ॥

दादुर धुनि चहु दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई ॥
नव पल्लव भए बिटप अनेका। साधक मन जस मिलें बिबेका ॥
अर्क जबास पात बिनु भयऊ। जस सुराज खल उद्यम गयऊ ॥
खोजत कतहुँ मिलइ नहिं धूरी। करइ क्रोध जिमि धरमहि दूरी ॥
ससि संपन्न सोह महि कैसी। उपकारी कै संपति जैसी ॥
निसि तम घन खद्योत बिराजा। जनु दंभिन्ह कर मिला समाजा ॥
महाबृष्टि चलि फूटि किआरीं । जिमि सुतंत्र भएँ बिगरहिं नारीं ॥
कृषी निरावहिं चतुर किसाना। जिमि बुध तजहिं मोह मद माना ॥
देखिअत चक्रबाक खग नाहीं। कलिहि पाइ जिमि धर्म पराहीं ॥
ऊषर बरषइ तृन नहिं जामा। जिमि हरिजन हियँ उपज न कामा ॥
बिबिध जंतु संकुल महि भ्राजा। प्रजा बाढ़ जिमि पाइ सुराजा ॥
जहँ तहँ रहे पथिक थकि नाना। जिमि इंद्रिय गन उपजें ग्याना ॥

दो. कबहुँ प्रबल बह मारुत जहँ तहँ मेघ बिलाहिं।
जिमि कपूत के उपजें कुल सद्धर्म नसाहिं ॥ १५(क) ॥

कबहुँ दिवस महँ निबिड़ तम कबहुँक प्रगट पतंग।
बिनसइ उपजइ ग्यान जिमि पाइ कुसंग सुसंग ॥ १५(ख) ॥

बरषा बिगत सरद रितु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई ॥
फूलें कास सकल महि छाई। जनु बरषाँ कृत प्रगट बुढ़ाई ॥
उदित अगस्ति पंथ जल सोषा। जिमि लोभहि सोषइ संतोषा ॥
सरिता सर निर्मल जल सोहा। संत हृदय जस गत मद मोहा ॥
रस रस सूख सरित सर पानी। ममता त्याग करहिं जिमि ग्यानी ॥
जानि सरद रितु खंजन आए। पाइ समय जिमि सुकृत सुहाए ॥
पंक न रेनु सोह असि धरनी। नीति निपुन नृप कै जसि करनी ॥
जल संकोच बिकल भइँ मीना। अबुध कुटुंबी जिमि धनहीना ॥
बिनु धन निर्मल सोह अकासा। हरिजन इव परिहरि सब आसा ॥
कहुँ कहुँ बृष्टि सारदी थोरी। कोउ एक पाव भगति जिमि मोरी ॥

दो. चले हरषि तजि नगर नृप तापस बनिक भिखारि।
जिमि हरिभगत पाइ श्रम तजहि आश्रमी चारि ॥ १६ ॥

रामचरितमानस मूलपाठ: किष्किन्धाकाण्ड(दोहा:१०-१६)

Поделиться в:

Доступные форматы для скачивания:

Скачать видео mp4

  • Информация по загрузке:

Скачать аудио mp3

Похожие видео

रामचरितमानस मूलपाठ: किष्किन्धाकाण्ड(दोहा:१६-२२)

रामचरितमानस मूलपाठ: किष्किन्धाकाण्ड(दोहा:१६-२२)

रामचरितमानस मूलपाठ: अरण्यकाण्ड(दोहा:६- १३)

रामचरितमानस मूलपाठ: अरण्यकाण्ड(दोहा:६- १३)

20 САМЫХ МАЛЕНЬКИХ ЛЕТАТЕЛЬНЫХ АППАРАТОВ В МИРЕ

20 САМЫХ МАЛЕНЬКИХ ЛЕТАТЕЛЬНЫХ АППАРАТОВ В МИРЕ

Bhusundi Ramayan

Bhusundi Ramayan

"हरि हर पद रति मति न कुतर की"तिन्ह कहुँ मधुर कथा रघुबर की"पवित्र श्री रामचरितमानस चौपाई || दोहा ९(9)

Нарендра Моди — клипы за каждый год с 1992 по 2025 год

Нарендра Моди — клипы за каждый год с 1992 по 2025 год

Самая Красивая Музыка В Мире 🌿 Послушайте Эту Музыку И Вам Станет Легче

Самая Красивая Музыка В Мире 🌿 Послушайте Эту Музыку И Вам Станет Легче

Почему средневековые крестьяне никогда не замерзали при температуре -40°F, а современные дома вым...

Почему средневековые крестьяне никогда не замерзали при температуре -40°F, а современные дома вым...

नवधा भक्ति रामायण चौपाई - Navadha Bhakti Ramayan Chaupaiyan | Ram Charit Manas| Vishal Saini

नवधा भक्ति रामायण चौपाई - Navadha Bhakti Ramayan Chaupaiyan | Ram Charit Manas| Vishal Saini

Как выбрать ИБП для дома? Что такое

Как выбрать ИБП для дома? Что такое "чистый синус" ? И забудьте про ампер-часы!

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:६८-७७)

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:६८-७७)

रामचरितमानस मूलपाठ: बालकाण्ड दोहा (५०-६२)

रामचरितमानस मूलपाठ: बालकाण्ड दोहा (५०-६२)

रामचरितमानस मूलपाठ: किष्किन्धाकाण्ड(दोहा:२२-३०)

रामचरितमानस मूलपाठ: किष्किन्धाकाण्ड(दोहा:२२-३०)

Tomaso Albinoni Oboe & Violin Concerto

Tomaso Albinoni Oboe & Violin Concerto

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१०२-१०८)

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१०२-१०८)

Почему беззеркалки победили: личный опыт фотографа

Почему беззеркалки победили: личный опыт фотографа

लव कुश ने सुनाई रामायण । Super Hit Stories | Ramayan Katha

लव कुश ने सुनाई रामायण । Super Hit Stories | Ramayan Katha

नारद-श्रीराम संवाद  #मानसगान #RamcharitManas

नारद-श्रीराम संवाद #मानसगान #RamcharitManas

रामायण : रामचरितमानस से : आकाशवाणी भाग 1 से 11तक Shri Ramcharitmanas Se : All India Radio - Ramayan

रामायण : रामचरितमानस से : आकाशवाणी भाग 1 से 11तक Shri Ramcharitmanas Se : All India Radio - Ramayan

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१३-२०)

रामचरितमानस मूलपाठ: उत्तरकाण्ड(दोहा:१३-२०)

© 2025 dtub. Все права защищены.



  • Контакты
  • О нас
  • Политика конфиденциальности



Контакты для правообладателей: [email protected]