रामायण कथा | हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाकर बचाए लक्ष्मण के प्राण
Автор: Tilak
Загружено: 2022-10-04
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• संकटमोचन नाम तिहारो - श्री हनुमान अष्टक | ...
श्री हनुमानाष्टक आदित्य गढ़वी के भावयुक्त स्वर में। संकटमोचन हनुमानाष्टक की संरचना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी. माना जाता है कि संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करने से व्यक्ति अपनी हर बाधा और पीड़ा से मुक्त हो जाता है और उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं।
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विभीषण राम को सूचित करते हैं कि आज मेघनाद पूरी शक्ति के साथ प्रबल वेग से युद्ध करने आ रहा है। इस सूचना पर राम हनुमान को अपनी सेना की व्यूह रचना का पुनर्निरीक्षण करने भेजते हैं। मेघनाद का प्रथम सामना हनुमान से होता है। हनुमान परास्त होते हैं। मेघनाद की ललकार पर लक्ष्मण उससे लड़ने को उद्धत होते हैं। विभीषण का परामर्श मानकर राम अंगद, हनुमान और नील को लक्ष्मण की सुरक्षा हेतु उनके आसपास रहने को भेजते हैं। लक्ष्मण और मेघनाद दोनों महाभट योद्धा हैं। उनके बीच कांटे की टक्कर होती है। मेघनाद एक बार फिर कपट युद्ध का सहारा लेता है, वह अदृश्य होकर बाण चलाता है। लक्ष्मण राम से ब्रह्मास्त्र चलाने की अनुमति माँगते हैं किन्तु राम इनकार करते हुए कहते हैं कि सम्मुख युद्ध न करने वाले पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग धर्म विरुद्ध है। लक्ष्मण धर्मसंगत युद्ध करते हैं किन्तु मेघनाद शक्ति का आह्वान करके लक्ष्मण पर आघात करता है। लक्ष्मण की ओर हुए इस प्रहार को रोकने में हनुमान की गदा और ऋषियों की मानसिक साधना विफल साबित रहती है। लक्ष्मण शक्ति के आघात से अवचेतन होकर गिर पड़ते हैं। तीनों लोकों में हाहाकार मचता है। अयोध्या में उर्मिला को अपशकुन के संकेत मिलते हैं। मेघनाद मूर्च्छित लक्ष्मण को लंका के अन्दर उठा ले जाना चाहता है किन्तु लक्ष्मण तो पृथ्वी को अपने फन पर धारण करने वाले शेषनाग के अवतार हैं, मेघनाद पसीना बहा जाता है किन्तु उन्हें उठा नहीं पाता। हनुमान मेघनाद को पदप्रहार से दूर फेंक देते हैं और लक्ष्मण को उठाकर सुरक्षित समुद्र तट पर ले जाते हैं। राम, सुग्रीव, हनुमान, अंगद, विभीषण आदि सभी वहाँ पहुचते हैं। उधर लंका में विजयभेरी बजती है। रावण व माल्यवान दोनों मेघनाद का अभिनन्दन करते हैं। दम्भ में चूर मेघनाद राम को अपना अगला लक्ष्य बताता है। उधर राम धरा पर मूर्च्छित पड़े अपने भाई लक्ष्मण का सिर गोद में रखकर विलाप करते हैं। वे कहते हैं कि यदि उनका भाई नहीं रहा तो वे भी जीवित नहीं रहेंगे। सुग्रीव युद्ध जारी रखकर लंका का नामोनिशान मिटाने की हुंकार भरते हैं। इसपर राम कहते हैं कि लक्ष्मण जैसे भाई को खोने के बाद वे युद्ध जीतकर क्या करेंगे। राम को मलाल है कि जब वे अयोध्या में उर्मिला के समक्ष पहुँचेंगे तो क्या उससे यह कहेंगे कि उन्होंने अपनी पत्नी को वापस पाने के लिये युद्ध किया और उसमें उसके पति की आहुति दे दी। अशोक वाटिका में सीता को विश्वास नहीं होता है कि लक्ष्मण को शक्ति लगी है। वे जानती हैं कि लक्ष्मण को कुछ हुआ तो उनके पति राम के प्राण भी नहीं बचेंगे। लक्ष्मण का सिर गोद में रखकर बैठे राम के अश्रु रुक नहीं रहे। विभीषण, सुग्रीव और जामवन्त सभी लक्ष्मण की हृदयगति धीमी पड़ते जाने से सारी आशाएं त्याग देते हैं। हनुमान पूछते हैं कि क्या वास्तव में अब कोई उपाय बाकी नहीं बचा है। विभीषण कहते हैं कि लंका की वनस्पति उपवन प्रयोगशाला में रहने वाले वैद्यराज सुषेण लक्ष्मण का उपचार कर सकते हैं किन्तु उन्हें वहाँ से लाना असम्भव है। इस असम्भव को सम्भव करने के लिये हनुमान लंका में जाते हैं और वैद्य सुषेण को उसके भवन सहित उठा लाते हैं। सुषेण अपने देश के शत्रु यानि लक्ष्मण का उपचार करने से इनकार कर देते हैं। तब विभीषण उनसे कहते हैं कि देशभक्ति से ऊपर वैद्य का शाश्वत धर्म रोगी की पीड़ा हरना है। सुषेण लक्ष्मण का नारी परीक्षण करते हैं। वे कहते हैं कि यदि लक्ष्मण को जीवित बचाना है तो सूर्योदय से पहले हिमालय पर्वत से मृतसंजीवनी बटी लानी होगी। सुषेण बूटी की पहचान बताते हैं कि इनमें दिव्य प्रकाश होता है। इसकी सुरक्षा देवता करते हैं। यदि कोई इनके निकट जाते हैं तो यह विलोपित हो जाती हैं। राम अल्प अवधि में हिमालय जाना और आना असम्भव मानते हैं किन्तु हनुमान उनसे आज्ञा लेकर आकाश मार्ग से हिमालय की ओर प्रस्थान करते हैं। उधर रावण को अपने गुप्तचर शूक से सूचना मिलती है कि वैद्य सुषेण की बतायी बूटी लेने हनुमान हिमालय गये हैं। रावण मायावी असुर कालनेमि को हनुमान की यात्रा बाधित करने की आज्ञा देता है। कालनेमि के पास द्रुतगति से कहीं भी पहुँचने की शक्ति है। वह अपनी माया से एक पर्वतीय सरोवर के निकट कुटिया का निर्माण करता है और साधु का वेश धारण करके राम नाम का जाप करने बैठ जाता है। हनुमान उसे कोई रामभक्त साधु समझकर वहाँ ठहरते हैं। कालनेमि हनुमान को अपना परिचय त्रिकालदर्शी साधु के रूप में देता है और कहता है कि उसे पता है कि वे सुषेण वैद्य के कहने पर लक्ष्मण के लिये संजीवनी बूटी लेने हिमालय पर जा रहे हैं।
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रामायण एक भारतीय टेलीविजन श्रृंखला है जो इसी नाम के प्राचीन भारतीय संस्कृत महाकाव्य पर आधारित है। यह श्रृंखला मूल रूप से 1987 और 1988 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थी।
Ramayan is an Indian television series based on ancient Indian Sanskrit epic of the same name. The show was originally aired between 1987 and 1988 on DD National. It was created, written, and directed by Ramanand Sagar. The show is primarily based on Valmiki's 'Ramayan' and Tulsidas' 'Ramcharitmanas'
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