#Siva
Автор: Nishkarma kriya yogi digital seva
Загружено: 2026-01-15
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नाच रहा है शिवराजहंस... आनंदमयी होकर नाच रहा है ||
सबके भीतर छिपा हुआ है... वह पास होकर भी हाथ न आकर ललचा रहा है || नाच रहा है ||
(Sub-Chorus):
पाँच तत्वों के किनारों पर...
पच-पच पच्चीस की चाल पर... || पाँच ||
जगत भर में भरा हुआ जगन्नाटक हंस...
होश (ज्ञान) से देखो तो वह है तुम्हारा ही अंश || नाच रहा है ||
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