Jaydev Mahaprabhu Geet Govind | Jaydev Mahaprabhu Charitra | Jaydev Mahaprabhu Indresh Upadhyay ji
Автор: Vrindavan Leela Dham
Загружено: 2025-11-23
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जयदेव महाप्रभु, एक प्रसिद्ध संस्कृत कवि और वैष्णव संत थे, जिन्हें 12वीं शताब्दी के आसपास का माना जाता है। वे राजा लक्ष्मण सेन के दरबारी कवि थे और उन्होंने 'गीत गोविंद' और 'रतिमंजरी' जैसे प्रसिद्ध ग्रंथों की रचना की। उनके जीवन की प्रमुख बातें ये हैं: उनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, माता-पिता का नाम भोजदेव और रमादेवी/बामा देवी था, और उनका विवाह पद्मावती से हुआ था।
पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन
माता-पिता: उनका जन्म भोजदेव और रमादेवी (या बामा देवी) के घर हुआ था।
विवाह: उनका विवाह पद्मावती से हुआ था। कहा जाता है कि यह विवाह स्वयं भगवान जगन्नाथ के आदेश पर हुआ था, जब एक ब्राह्मण उन्हें अपनी बेटी के साथ ले आया था।
साहित्यिक योगदान
मुख्य रचनाएँ: उन्होंने 'गीत गोविंद' और 'रतिमंजरी' की रचना की।
गीत गोविंद: इसे श्रीमद्भागवत के बाद राधा-कृष्ण की लीलाओं की सबसे उत्कृष्ट साहित्यिक अभिव्यक्ति माना जाता है।
अन्य रचनाएँ: 'गीत गोविंद' से ही विष्णु के दस अवतारों का वर्णन करने वाली 'दश-अवतार-गीता' ली गई है।
आध्यात्मिक और धार्मिक जीवन
भक्ति: जयदेव एक वैष्णव भक्त और संत थे, जो भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे।
भक्ति का अनुभव: 'गीत गोविंद' में उन्होंने राधा-कृष्ण की अंतरंग लीलाओं का वर्णन किया है। एक बार जब वे 'गीत गोविंद' लिख रहे थे, तो एक श्लोक की पंक्ति, "देहि पादपल्लवम् उदारम्" को लिखने में उन्हें संकोच हो रहा था, लेकिन रात में स्वयं कृष्ण ने यह पंक्ति लिख दी थी।
गंगा के प्रति निष्ठा: जब वे वृद्ध हो गए, तो गंगा नदी ने उनके आश्रम के पास एक सरोवर में प्रकट होकर उन्हें वहीं स्नान करने की आज्ञा दी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
अंतिम समय: उन्होंने अपने जीवन का अंतिम समय वृंदावन में बिताया, जहाँ से वे जगन्नाथ पुरी गए।
वर्तमान में
जयदेव मेला: उनके जन्मस्थान केंडुली में, उनके तिरोभाव दिवस (पौष-संक्रांति) पर एक वार्षिक उत्सव मनाया जाता है, जिसे 'जयदेव मेला' कहा जाता है।
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