सूरज भगवान की कथा -2 ।। Suraj Bhawan Ki Katha -2 ।।
Автор: Vrat Katha Dhara
Загружено: 2025-12-28
Просмотров: 602
सूरज भगवान की कथा – 2
एक ब्राह्मण सूरज भगवान का भक्त था। नहाता धोता कथा कहानी कहता था पर कमाता नहीं था। ब्राह्मण घर में रहता तो ब्राह्मणी कमाने के लिए बार-बार कह कर परेशान करती। बाहर कहीं जाता तो बाहर भी लोग उसे तरह-तरह से अपमानित करते। अतः एक दिन नहा-धोकर अपने पूजन की सामग्री लेकर वह जंगल में चला गया। वहाँ एक सूखे पीपल के नीचे बैठ कर पूजा पाठ करी और सूरज भगवान की कथा कही। वहाँ पीपल के पास एक सूखा सां तालाब भी था। उसमें थोड़ा सा ही पानी था। उसी पानी से लोटा भरकर सूर्य भगवान के जल चढ़ाया। पूजा का जल बहकर पीपल और तालाब में भी गया। जल के जाते ही सूखा पीपल हरा हो गया और तालाब स्वच्छ जल से भर गया। उसमें सूर्य भगवान दिखाई देने लगे। कहने लगे, "ब्राहाण मांग तू क्या मांगता हैं?" ब्राह्मण ने यह सुना तो वो घबराया। उसने सोचा लोग कहते हैं कि पीपल में भूत रहता हैं जरुर वही बोल रहा है। रोज वह पूजा करता तभी यह आवाज आती। सुन-सुन कर वह चिन्ता के कारण दुबला होने लगा। एक दिन ब्राह्मणी ने पूछा, "आप रोज-रोज दुबले क्यों होते जा रहे है?" ब्राह्मण ने सारा हाल बताया तो ब्राह्मणी ने कहा, "तुम्हारे पूजा करते ही आवाज आती है। इससे तो यह लगता है कि वे सूरज भगवान हैं। इस बार जब आवाज आवे तो सब कुछ मांग लेना।" ब्राह्मण ने कहा, "कैसे माँगू? ज्यादा कुछ कहना होगा तो मैं भूल ही जाउँगा। कोई ऐसी तरकीब बता जो थोड़े से शब्दों में घणा-सा मिल जावे।" ब्राह्मणी ने कहा, "तुम इस प्रकार कहना नौ खण्डे महल के अन्दर सोने के पालने में पड़पोते को दास-दासियों द्वारा खिलाते अपनी आखों से देखूँ। इस प्रकार लम्बी आंखे महल बेटे पोते पड़पोते और धन सब चीज मिल जायेगी। क्योंकि धन होगा तभी तो सोने का पालना और दाय दासी होंगे और आँखे और घुटने ठीक होंगे तभी ती पड़पोते को सोने के झूले में झूला झूला सकेंगे और देख सकेंगे।" दूसरे दिन पूजा के बाद आवाज आई तो ब्राहाण ने वैसे ही माँग लिया जैसे ब्राहाणी ने कहा था। सूरज भगवान ने कहा, "दिखने में तो भोला लगता था पर एक ही वर में दस वर माँग लिए हैं।" ब्राह्मण ने कहा, "देओ तो इतना ही देओ नहीं तो कुछ भी मत दो।" सूरज भगवान ने कहा, "जा तेरे इतना ही हो जायेगा।" घर आया तो देखता क्या है कि टूटी-सी झोंपड़ी की जगह नौखण्डा महल खड़ा था। दास दासी आ जा रहे थे। ब्राह्मण ने एक दासी को रोककर पूछा," अरे मेरी टूटी-सी झोपड़ी और बूढ़ी सी ब्राह्मणी थी वह कहां गई।" उसी समय महल की खिड़की से सुन्दर सी औरत हीरे मोती के गहने पहने रानियों से कपड़े गहने पहने खड़ी थी और आवाज दे रही थी कि आ जावो यह अपना ही घर है। सूर्य भगवान ने कृपा करी है। ब्राह्मण ने कहा, "हम इतने धन का क्या करेंगे?" ब्राह्मणी ने कहा, "धन से क्या नहीं होता? दान पुण्य यज्ञ होम करेंगे।" पीछे सबको जिमाया। पान देकर न्यौता दिया, फूल देकर बुलाया। सब ब्राह्मणों को जिमाकर सोने का टका दक्षिणा में दिया।
सब लोग राजा के बदले ब्राह्मण की जय बोलने लगे। चुगल खोरों ने जाकर राजा से चुगली कर दी। राजा जी आपके बदले लोग ब्राह्मण की जय बोल रहे हैं। राजा ने ब्राह्मण को बुलाया और पूछा, "कल तो तेरे खाने का भी घाटा था और आज इतना धन हो गया सो कैसे हुआ?" ब्राह्मण ने कहा, "मुझे तो सूर्य भगवान टूटे हैं।" राजा ने कहा, "मेरे पुत्र नहीं है सो मुझे क्या करना चाहिए?" ब्राह्मण ने राजा को सूर्य भगवान की पूजा की विधी बताई। राजा ने वैसा ही किया तो उसके पुत्र हो गया। सब लोग सूर्य भगवान की जय बोलने लगे। हे सूर्य भगवान जैसी ब्राह्मण की और राजा की मनसा पूरी करी वैसी स
।बकी करना। कहानी कहने वाले सुनने वाले और हुँकारा देने वाले की सबकी मंशा पूरी करना।
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: