देहा अभिमान छोड़ो तभी भगवत प्राप्ति | अष्टावक्र जी महाराज । पुज्य: गुरुदेव वाणी
Автор: Naam Mahima
Загружено: 2026-01-17
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देह अभिमान छोड़ो तभी भगवत प्राप्ति | अष्टावक्र जी महाराज । पुज्य: गुरुदेव वाणी #sanatandharma
@BhajanMarg @SadhanPath
🏵️देह के कलिमान और देह अभिमान में डूबा हुआ मनुष्य भगवत प्राप्ति नहीं कर सकता — यही सत्य अष्टावक्र जी महाराज और पूज्य सद्गुरुदेव श्री प्रेमानंद जी महाराज की वाणी में बार-बार प्रकट होता है।
🏵️अष्टावक्र जी महाराज कहते हैं —
“तू देह नहीं है, तू मन नहीं है, तू शुद्ध आत्मा है।”
जब तक जीव अपने आप को शरीर मानता है, तब तक वह जन्म-मरण के बंधन में रहता है।
🙏🏼पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार —
भगवान बाहर नहीं, अहंकार और देहाभिमान के हटते ही भीतर प्रकट होते हैं।
सच्ची भक्ति वही है, जहाँ ‘मैं’ मिटता है और ‘भगवान’ प्रकट होते हैं।
🙏🏼 इस सत्संग में आप जानेंगे:👀
• देह के कलिमान से भगवत प्राप्ति क्यों नहीं होती
• अष्टावक्र जी महाराज कौन थे
• आत्मज्ञान क्या है और मोक्ष कैसे मिलता है
• प्रेमानंद जी महाराज की वाणी में भक्ति का रहस्य
• गृहस्थ जीवन में रहते हुए भगवान को पाने का मार्ग
यह वीडियो आपको देह से ऊपर उठाकर आत्मा की ओर ले जाएगा।
सुनिए, समझिए और अपने जीवन में उतारिए।
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