गुरु वाक्यम् एपिसोड 630 : खुद को अनुभव करो।
Автор: Shiv Yog
Загружено: 2021-08-30
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ना तो तुम ये शरीर हो, और न ही तुम मन हो। यह शरीर और मन तुम्हारे हैं, तुम नहीं हो। तुम अनंत हो। तुम्हारे शरीर की तीन अवस्थाएं हैं - जागृत, स्वप्न और सुप्त अवस्था। तुम्हारी चेतना की अवस्था इन अवस्थाओं से ऊपर है, और वो है "तुरीय अवस्था"। तुम्हारा मन और अवचेतन मस्तिष्क (Sub -Conscious mind) शरीर के सोने पर भी सदा जागृत रहते हैं। तुम्हारे लिए जितना सांस लेना ज़रूरी है, उतना ही तुरीय अवस्था को अनुभव करना ज़रूरी है, क्योंकि तभी तुम अपने वास्तविक स्वरुप को जान सकोगे।
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