श्री राधा रानी आरती । आरती श्री वृषभानु सुता की । Radha JI Aarti
Автор: Yogiraj Manoj
Загружено: 2025-08-30
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श्री राधा रानी आरती । आरती श्री वृषभानु सुता की । Radha JI Aarti
Lyrics -
आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ।।
त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि । पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ।। ।। आरती श्री वृषभानुसुता की.।।
मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरति सोहनि । अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि, प्रिय अति सदा सखी ललिता की ।। ।। आरती श्री वृषभानुसुता की.।।
संतत सेव्य सत मुनि जनकी, आकर अमित दिव्यगुन गनकी । आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी, अति अमूल्य सम्पति समता की ।। ।। आरती श्री वृषभानुसुता की ।।
। आरती श्री वृषभानुसुता की ।
कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि, चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि । जगजननि जग दुखनिवारिणि, आदि अनादिशक्ति विभुता की ।। ।। आरती श्री वृषभानुसुता की.।।
आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ।।
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