“कर्म कभी तुरंत जवाब नहीं देता,पर जवाब ज़रूर देता है…” 💔
Автор: kahaniyo ka pitara
Загружено: 2025-12-18
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जिस बहू को हर दिन तानों, अपमान और ज़ुल्म से तोड़ा गया,
वही बहू एक दिन खामोशी से उस घर को छोड़ गई…
सास-ससुर को लगा था —
“बहू तो बाहर से आई है, चली जाएगी।”
पर वक़्त ने सिखाया कि
बुढ़ापे में वही रिश्ता सबसे ज़्यादा अपना होता है
जिसे हमने सबसे ज़्यादा सताया होता है।
यह कहानी उन लोगों के लिए है
जो बहू को बेटी नहीं, नौकरानी समझते हैं।
और उन बहुओं के लिए भी
जो हर दिन चुप रहकर सब सहती हैं।
👉 यह कहानी केवल एक घर की नहीं,
हज़ारों घरों की सच्चाई है।
पूरा वीडियो ज़रूर देखें…
क्योंकि अंत दिल को छू जाएगा
“जो आज किसी को रुलाते हैं,
कल वही आँसुओं के लिए तरसते हैं।”
👉 अगर ये कहानी दिल को छू गई हो तो ❤️ Like ज़रूर करें।
💬 आप क्या सोचते हैं — गलती किसकी थी?
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ताकि हर सास-ससुर समझ सकें कि बहू भी बेटी होती है।
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