कन्हैया पार्टी खेड़ी टोडाभीम ने मछला हरण की जबरदस्त कथा सुनाई गांव खेड़ी में
Автор: Kanhaiya dangal mahaswa
Загружено: 2026-01-19
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#कन्हैया_पार्टी_खेड़ी ने अपने गांव में अलग अंदाज से गाई कथा
मछला हरण की कथा
मनीराम खेड़ी मेड़िया
चकेरी -
2 गांवड़ी मीणा - गुरु वशिष्ठ बुलाय राम ने सिंहासन बैठाया, कई नाथ मेरे मन की लगन मिटा दे जीत लिए सब भूप यज्ञ मेरो अश्वमेघ यज्ञ करा दे गुरु वशिष्ठ-राम संवाद
3 परीता - विलोचन राजा को पेट तो बढ़े रात दिन दूजो...
4 ऐंडा - रूप बदल कर राजा बणग्यो, बढ़ता खागो जाडी को, मन को कांटों कढ़ गयो, धोखेबाज कबाड़ी को शनिदेव का राजा चंद्रदेव से संवाद
5 ऐंडा चौपड़ पर, भायली मोरू तालिया ने नीबू, नारंगी का फूल झड़ग्या बगिया में ऊंखा एवं अनिरुद्घ के बीच का संवाद
6 डेकवा - pandvo ka kapat raja uttanpad
7 पीलोदा - राजा मोरध्वज
8 #शफीपुरा - कीचक वध
9 #झाडौ़दा - हरदोल का भात
10 #नादौती - लव कुश कथा
इन गीतों को सुनने के लिए दंगलों में कई गाँवो के लोगो के आने से एक हुजूम जम जाता हैं। इस भीड़ का फायदा उठाने के लिए कई राजनेता भी इनका प्रयोग राजनीतिक लाभों के लिए करने लगे हैं और इनमें शिरकत करके लोगो के बीच लोकप्रियता हासिल करते रहते हैं।
पद दंगल हमें हमारी संस्कृति से जोडे रखने का कार्य करते हैं। पद दंगलों के माध्यम से संस्कृति जीवंत होती है, वहीं आपसी भाईचारा एवं समन्वय बढता है।
पद दंगल भारतीय संस्कृति को बचाने में सहायक हैं। इस प्रकार के आयोजनों से लोगों में भाईचारा, समाजवाद की भावना, सामाजिक सौहार्द्रता, एकता एवं धार्मिक भावना बढ़ती है। साथ ही लोगों को धर्मलाभ मिलने के साथ-साथ धार्मिक जानकारियाँ भी मिलती हैं।
विधायक रमेश चन्द मीना ने ऐसे धार्मिक आयोजनों को ग्रामीण संस्कृति की धरोहर की संज्ञा दी। इन्होने पद दंगलों को संस्कृति के परिचायक बताते हुए इनके आयोजनों में बढ़-चढ़ कर भाग लेने का आग्रह किया।
इनका विस्तार सवाई माधोपुर, दौसा, करौली, धौलपुर, भरतपुर, अलवर व बूंदी के गाँवो में देखा जा सकता हैं। खासकर सवाई माधोपुर व करौली में इनका अधिक प्रचलन है। यहाँ झाडौ़दा, राणोली, नादौती, शफीपुरा, डिबसया, फुलवाड़ा, चकेरी, जड़ावता, ढेकवा, खंड़ीप आदि गाँवो में इनका अधिक प्रचलन हैं।
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