🔱999🕉️108 सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरन्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
Автор: Vaishno Shakti Dham
Загружено: 2026-01-14
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108 सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरन्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
सर्व मंगल मांगल्ये" मंत्र देवी दुर्गा को समर्पित एक शक्तिशाली मंत्र है, जिसका पूरा श्लोक है: "सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरन्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।". यह मंत्र सभी प्रकार के मंगल (कल्याण) और शुभ कार्यों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली, गौरी (सुंदर) और नारायणी देवी को नमस्कार करता है, और यह नवरात्रि और अन्य शुभ अवसरों पर देवी दुर्गा की कृपा पाने के लिए जपा जाता है.
मंत्र (संस्कृत में):
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरन्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
मंत्र का अर्थ (सरल हिंदी में):
सर्व मंगल मांगल्ये: सभी मंगलों में मंगल (सबसे शुभ).
शिवे सर्वार्थ साधिके: कल्याणकारी, सभी इच्छाओं (अर्थों) को सिद्ध करने वाली.
शरन्ये त्रयम्बिके: शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली (त्रयम्बिके).
गौरी नारायणी: हे गौरी, हे नारायणी.
नमोस्तुते: आपको नमस्कार है.
इस मंत्र का महत्व:
यह मंत्र देवी दुर्गा को समर्पित है और उनके नौ स्वरूपों में से एक का आह्वान करता है.
यह जीवन में सुख, समृद्धि, सुरक्षा और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए जपा जाता है.
नवरात्रि जैसे पवित्र अवसरों पर इसका विशेष महत्व है और इसे अक्सर 108 बार दोहराया जाता है.
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