मकर संक्रांति की कथा। Makar Sankranti Ki Katha l
Автор: Spiritual Point
Загружено: 2026-01-14
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मकर संक्रांति की पावन कथा सूर्य देव और शनि देव से जुड़ी हुई है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य देव और शनि देव पिता-पुत्र होने के बावजूद स्वभाव में भिन्न थे। शनि देव न्याय और कर्म के देवता हैं, जबकि सूर्य देव तेज, ऊर्जा और प्रकाश के प्रतीक हैं। मतभेदों के कारण दोनों के बीच लंबे समय तक दूरी बनी रही।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। यह दिन पिता-पुत्र के मिलन, अहंकार के त्याग और संबंधों में मधुरता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सूर्य देव शनि देव के घर जाकर उन्हें सम्मान देते हैं, जिससे यह संदेश मिलता है कि प्रेम, क्षमा और समर्पण से हर संबंध सुधर सकता है।
मकर संक्रांति पर सूर्य को अर्घ्य देना, दान-पुण्य करना और तिल-गुड़ का सेवन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि धर्म, कर्म और प्रेम के मार्ग पर चलकर जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
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