NIOS कक्षा 12 हिंदी | पाठ 3 रीतिकाव्य | भाग 1 | बिहारी | सम्पूर्ण व्याख्या @StudentDostNIOS
Автор: Student Dost NIOS
Загружено: 2026-01-07
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🌿 सारांश
• रीतिकाव्य हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण काव्यधारा है, जिसमें श्रृंगार रस की प्रधानता होती है।
• रीतिकाव्य में नायिका-भेद, नख-शिख वर्णन और काव्यशास्त्रीय नियमों का पालन किया जाता है।
• बिहारी रीतिकाल के प्रमुख कवि माने जाते हैं।
• बिहारी का काव्य संक्षिप्त, गूढ़ और अर्थ-गंभीर है।
• रीतिकाव्य में सौंदर्य, भाव और अलंकारों का सुंदर समन्वय मिलता है।
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✨ मुख्य बिंदु
1. रीतिकाव्य का परिचय –
• रीतिकाव्य में काव्य रचना निश्चित नियमों (रीति) के अनुसार होती है।
• इसमें श्रृंगार रस की प्रधानता रहती है।
2. कवि परिचय (बिहारी) –
• बिहारी रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि हैं।
• उनकी प्रमुख रचना – बिहारी सतसई
3. काव्य की विशेषताएँ –
• संक्षिप्त दोहों में गूढ़ भाव
• शब्द-सौंदर्य और अर्थ-सौंदर्य
• अलंकारों का सुंदर प्रयोग
4. भाषा और शैली –
• ब्रज भाषा
• दोहा छंद
• प्रतीकात्मक और संकेतात्मक शैली
5. साहित्यिक महत्व –
• रीतिकाव्य को ऊँचाई प्रदान की
• हिंदी साहित्य में श्रृंगार काव्य को समृद्ध किया
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📝 परीक्षा में संभावित प्रश्न
1. रीतिकाव्य से आप क्या समझते हैं?
2. बिहारी का साहित्यिक परिचय दीजिए।
3. बिहारी सतसई की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
4. रीतिकाव्य में श्रृंगार रस का महत्व स्पष्ट कीजिए।
5. बिहारी की भाषा और शैली पर टिप्पणी लिखिए।
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