रीमद्भगवद्गीता
Автор: Praveen Gururani
Загружено: 2026-01-27
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जब अर्जुन करुणा से भर गया और शोक से व्याकुल हो उठा,
तब उसने भगवान श्रीकृष्ण से यह बात कही।
वह अपने ही स्वजनों को युद्ध के लिए सामने खड़ा देखकर
अत्यंत व्यथित और चिंतित हो गया।
यह श्लोक अर्जुन की
मानसिक स्थिति और करुणा से उत्पन्न विषाद को दर्शाता है,
यहीं से गीता के उपदेश की भूमिका प्रारंभ होती है।
🙏 जय श्रीकृष्ण
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