टूट रहा पिता का मन
Автор: प्रभु श्रीराम जानकी जी ही परम ब्रह्म परमेश्वर है |
Загружено: 2026-01-14
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यह भजन रामायण के उस अत्यंत भावुक क्षण को दर्शाता है जब सीता स्वयंवर में बड़े-बड़े महारथी शिव धनुष को हिला भी न सके। राजा जनक की हताशा, एक पिता की पीड़ा और माता सुनयना के आँखों में छिपे तूफ़ान का मर्मस्पर्शी वर्णन इस गीत में किया गया है। क्या कोई वीर नहीं है जो जानकी का हाथ थाम सके? सुनिए इस हृदयस्पर्शी भजन को।
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