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Автор: दिल का फ़ैसला (माफ़ करना या बदला लेना?)
Загружено: 2026-01-12
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एक माँ ने 11 साल तक चुपचाप बेटे की ज़िंदगी संभाली—हर महीने सपोर्ट, हर मुश्किल में साथ। लेकिन New Year के दिन बेटे ने अपने ही घर में माँ को “निकल जाओ” कह दिया। अगले ही दिन 10:30 बजे बेटे का फोन आया—कार्ड बंद, पैसा नहीं आया… और माँ ने पहली बार अपने लिए खड़े होकर वो फैसला लिया जिसने सब कुछ बदल दिया। यह कहानी बदले की नहीं—सीमा, सम्मान और सच्ची माफी की है। अगर आपके साथ भी अपनों ने आपको “obligation” बना दिया हो, तो यह कहानी आपके दिल पर लगेगी। आप क्या करते—पैसा बंद करते या एक और मौका देते?
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