शिव स्पेशल भजन | गले में सर्पो की माला | शिव भजन | शिव भक्ति गीत | Shiv Bhajan | Shiv DevotionalSong
Автор: शुभ लाभ भक्ति
Загружено: 2025-11-24
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शिव स्पेशल भजन | गले में सर्पो की माला | शिव भजन | शिव भक्ति गीत | Shiv Bhajan | Shiv DevotionalSong
भगवान शिव, हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं. वे त्रिदेवों में से एक हैं और उन्हें देवों का देव महादेव भी कहा जाता है. भगवान शिव को शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार जैसे नामों से भी जाना जाता है.
भगवान शिव के बारे में कुछ खास बातें:
शिव को सृष्टि, स्थिति, और संहार का त्रिमूर्ति माना जाता है.
शिव को तपस्या, ध्यान, और विराग का देवता भी माना जाता है.
शिव को अनंत, निराकार, अखंड, नित्य, अविनाशी, निःश्वसित, निरंजन, और निर्मल माना जाता है.
शिव को त्रिशूल, डमरू, गंगा, तांडव, नाग, चंद्रमा, और धारा आदि के साथ दिखाया जाता है.
शिव ने कई रुद्रावतार लिए, जिनमें 11वें रुद्र अवतार महावीर हनुमान माने गए हैं.
शिव के दो पुत्र हैं, गणेश और कार्तिकेय.
शिव या महादेव सनातन संस्कृति में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि कई नामों से भी जाना जाता है।
अलग-अलग पुराणों में भगवान शिव और विष्णु के जन्म के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को स्वयंभू माना गया है जो कि विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु स्वयंभू हैं। विष्णु पुराण के अनुसार ब्रह्मा, भगवान विष्णु की नाभि कमल से पैदा हुए जबकि शिव, भगवान विष्णु के माथे के तेज से उत्पन्न हुए हैं।
शिव हिंदु धर्म के सबसे प्राचीन और लोकप्रिय देवता हैं, उन्हे जगत का संहारक देवता भी माना जाता है। हिंदू धर्म और विशेष रूप से शैव, शाक्त संप्रदायो में उन्हे परब्रह्म (सर्वोच्च ईश्वर) माना गया है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं।
भगवान शिव स्वयंभू हैं, वे ब्रह्मांड के निर्माण से पहले से ही अस्तित्व में थे । उनका न तो कोई आरंभ है और न ही कोई अंत। दूसरी ओर, भगवान राम त्रेता युग में पृथ्वी पर आए और त्रेता युग के अंत में दुनिया छोड़ दी, लेकिन इससे भगवान राम छोटे या कमतर नहीं हो जाते।
भगवान शिव तो आदि अनंत है उनका जन्म उम्र मै तो क्या कोई नाही बता सकता। भगवान शिव अजन्मा,निराकार,अविनाशी,अमरनाथ, कालो का काल महाकाल, महा मृत्युंजय भगवान है ,उनका अपना शरीर ही नहीं है तो मृत्यु भी नहीं है तो उम्र भी नहीं है। उनका अपना शरीर नहीं है अर्थात भगवान शिव अशरीरी होने से उनकी ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा होती है।
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