अनोखा श्राप । हिंदी कहानी Moral Story Fairy Tales Rshi ka Anokha Shrap ni Kahaniyan
Автор: हमर.KAHANI.टून
Загружено: 2026-01-18
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अनोखा श्राप । हिंदी कहानी Moral Story Fairy Tales Rshi ka Anokha Shrap ni Kahaniyan
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बहुत समय पहले की बात है। हिमालय की तलहटी में एक घना जंगल था। उसी जंगल के बीचों-बीच एक शांत तपोवन था। चारों ओर ऊँचे साल और देवदार के पेड़, कलकल बहती नदी, और हर समय गूंजती रहती थी पक्षियों की मधुर आवाज़।
इसी तपोवन में रहते थे ऋषि महात्मा वसिष्ठानंद।
वह कोई साधारण ऋषि नहीं थे।
उनकी तपस्या से देवता भी प्रसन्न रहते थे।
उनकी आँखों में शांति थी, लेकिन क्रोध आने पर वही आँखें अग्नि बन जाती थीं।
तपोवन का एक सख्त नियम था—
“यहाँ न झूठ चलेगा, न अहंकार, और न ही शराब।”
जो भी उस नियम को तोड़ता, उसे ऋषि का दंड भुगतना पड़ता।
उसी जंगल से कुछ दूरी पर एक छोटा-सा नगर था — सूर्यनगर।
सूर्यनगर में एक आदमी रहता था—
नाम था कालू।
कालू मज़ाकिया था, तेज़ बोलता था, और सबसे बड़ी बात—
शराब का पक्का शौकीन।
सुबह बोले— “आज से नहीं पियूँगा”
शाम होते-होते— “एक ही पैग तो है”
नगर में लोग कहते—
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