रंगरोड़ी
Автор: Khunti desi vlog
Загружено: 2026-01-15
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रंगरोड़ी टूसू मेला बड़ाबारू,खूँटी झारखण्ड
15 जनवरी को झारखंड के कई इलाकों, खासकर खूंटी के रंगरोड़ी गांव में हर साल पारंपरिक टुसू मेला (मकर संक्रांति के अवसर पर) धूमधाम से मनाया जाता है, जहाँ ग्रामीण आकर्षक चौड़ल (टुसू प्रतिमाएं) लेकर आते हैं, पारंपरिक गीत गाते हैं और लोक संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन जंगली हाथियों के खतरे के कारण गंधौरिया धाम जैसे कुछ स्थानों पर यह मेला 2026 में स्थगित करना पड़ा है, हालांकि अन्य जगहों पर यह उत्सव जारी है।
रंगरोड़ी टुसू मेला (15 जनवरी):
स्थान: खूंटी से लगभग 15 किमी दूर रंगरोड़ी गांव के कांची नदी तट पर।
मुख्य आकर्षण: रंगरोड़ी टुसू मेला समिति द्वारा आयोजित, आसपास के दर्जन भर गांवों से महिलाएं आकर्षक चौड़ल (टुसू) के साथ नाचते-गाते पहुंचती हैं और भगवान शिव की पूजा करती हैं, जिसे देखने हजारों लोग आते हैं।
टुसू मेले का सामान्य स्वरूप (15 जनवरी):
कब: मकर संक्रांति (14-15 जनवरी) के आसपास।
क्या: यह झारखंड का एक प्राचीन लोक उत्सव है, जो फसल कटाई से जुड़ा है और टुसू देवी को समर्पित है।
कैसे: महिलाएं टुसू प्रतिमाएं (चौड़ल) लाती हैं, पारंपरिक टुसू गीत गाती हैं, नृत्य करती हैं और लोक कला का प्रदर्शन होता है, जैसे रांची के मोरहाबादी मैदान में।
महत्व: यह आदिवासी संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक है, जो सरल लोकगीतों और उल्लास से भरा होता है।
15 जनवरी को रिंग रोड स्थित बाबा धाम के विशाल प्रांगण में एक बेहद ही शानदार और भव्य मेले का आयोजन किया गया। मकर संक्रांति के उत्साह से सराबोर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शनार्थी यहाँ पहुंचे। चारों तरफ रंग-बिरंगी लाइटों, गुब्बारों और खिलौनों की दुकानों से पूरा रिंग रोड क्षेत्र गुलजार नजर आ रहा था। मेले की रौनक देखते ही बन रही थी, जहाँ बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था।
मनोरंजन का मुख्य केंद्र: नाच-गाना और ऑर्केस्ट्रा
इस मेले का सबसे आकर्षक और ऊर्जावान हिस्सा यहाँ आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाच-गाना प्रतियोगिता रही। जैसे ही शाम ढली, विशाल मंच पर 'ग्रैंड ऑर्केस्ट्रा' की शुरुआत हुई।
• धमाकेदार परफॉर्मेंस: नामी कलाकारों और डांस ग्रुप्स ने एक से बढ़कर एक फिल्मी और लोक गीतों पर अपनी प्रस्तुति दी।
• डांस प्रतियोगिता: स्थानीय युवाओं और पेशेवर डांसरों के बीच आयोजित 'नाच प्रतियोगिता' ने दर्शकों का दिल जीत लिया। कलाकारों के बीच की कड़ी टक्कर को देखकर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
• संगीत की लहर: आधुनिक वाद्य यंत्रों और धमाकेदार साउंड सिस्टम के साथ ऑर्केस्ट्रा के गायकों ने अपनी आवाज से समां बांध दिया। देर रात तक लोग संगीत की धुनों पर थिरकते नजर आए।
झूले और खान-पान का आनंद
मेले में मनोरंजन के लिए बड़े-बड़े झूले (जैसे ड्रैगन ट्रेन, कोलंबस और जायंट व्हील) आकर्षण का केंद्र रहे। खाने-पीने के शौकीनों के लिए चाट-पकौड़े, गरमा-गरम जलेबी और मकर संक्रांति के विशेष व्यंजनों की दुकानों पर भारी भीड़ देखी गई।
सुरक्षा और व्यवस्था
हजारों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आयोजकों द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ चप्पे-चप्पे पर तैनात रही, ताकि श्रद्धालु और मेलार्थी शांतिपूर्वक आनंद ले सकें।
धार्मिक श्रद्धा का केंद्र रहा, बल्कि इसने कला और संस्कृति के प्रति लोगों के प्रेम को भी एक नया मंच प्रदान किया। बाबा धाम की गूंज और ऑर्केस्ट्रा की थिरकन ने इस दिन को यादगार बना दिया।
प्राकृतिक और शांत वातावरण
इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का शांत और प्रदूषण मुक्त वातावरण है। चारों तरफ फैली हरियाली और शुद्ध हवा मन को तुरंत सुकून पहुंचाती है। यहाँ पहुँचते ही ऐसा महसूस होता है मानो हम प्रकृति के करीब आ गए हों। ध्यान और साधना करने वालों के लिए यह एक आदर्श स्थान है, जहाँ पक्षियों की चहचहाहट और मंदिर की घंटियों की ध्वनि के बीच मन एकाग्र हो जाता है।
चमत्कारी शिवलिंग और निरंतर जलाभिषेक
धाम का मुख्य आकर्षण यहाँ स्थापित पवित्र शिवलिंग है। इस मंदिर की महिमा निराली है:
• स्वयं जलार्पण: यहाँ की सबसे खास बात यह है कि शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से या विशेष व्यवस्था के माध्यम से निरंतर जल की धारा प्रवाहित होती रहती है। शिवजी का यह निरंतर जलाभिषेक भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।
• आध्यात्मिक ऊर्जा: मान्यता है कि यहाँ श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही मन की अशांति दूर हो जाती है।
श्रद्धालुओं के लिए एक सुकून भरा अनुभव
रंगोली बाबा धाम आने वाले लोग केवल दर्शन के लिए नहीं, बल्कि यहाँ की पवित्र ऊर्जा को महसूस करने आते हैं। मंदिर परिसर की बनावट और वहां की स्वच्छता इसे और भी खास बनाती है। परिवार के साथ कुछ समय बिताने और भगवान शिव की भक्ति में लीन होने के लिए यह स्थान सर्वश्रेष्ठ है।
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