गुरु वाक्यम् एपिसोड 619 : अपनी चेतना के पास रहिए
Автор: Shiv Yog
Загружено: 2021-08-08
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हर मनुष्य के दो स्वरुप हैं। एक है यह स्थूल शरीर, जो हर दिन विघटित होता रहता है, और सीमित है। परन्तु दूसरा है आत्मिक स्वरुप जो असीमित है, सर्वशक्तिमान है ,अमर है, अनंत है। मनुष्य की चेतना जिस स्वरुप में स्थित होगी, वह वैसा ही हो जाएगा। शिवयोगी को साधना के द्वारा अपने आत्म स्वरुप में स्थित रहने का अभ्यास करना चाहिए, जिससे उसमे अनंत की शक्तियां जागृत हो जाती हैं। अपने आत्मस्वरूप से जुड़ने से मनुष्य के सारे नकारात्मक भाव तुरंत नष्ट हो जाते हैं।
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