Laxman Mandir Chanderi | चंदेरी का शानदार मन्दिर | पानी में बहा एक अनमोल रत्न | Shahzadi Ka Roza ?
Автор: Vibhu Film City
Загружено: 2025-12-06
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Laxman Mandir Chanderi | चंदेरी का शानदार मन्दिर | पानी में बहा एक अनमोल रत्न | Shahzadi Ka Roja ?
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Discription:-
चंदेरी (मध्य प्रदेश) एक ऐतिहासिक नगर है जो अपनी वास्तुकला, साड़ियों और किंवदंतियों के लिए प्रसिद्ध है। आपने जिन दो स्थलों, लक्ष्मण मंदिर और शहजादी का रोज़ा,l
1. लक्ष्मण मंदिर (Laxman Mandir)
यह मंदिर चंदेरी के प्रसिद्ध परमेश्वर ताल के पास स्थित है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि इसके निर्माण के पीछे एक लोककथा भी प्रचलित है।
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में बुंदेला राजा अनिरुद्ध सिंह ने करवाया था। हालांकि, मंदिर की वास्तुकला और वहां मौजूद कुछ पुरानी मूर्तियों को देखकर पुरातत्वविद मानते हैं कि यह स्थान उससे भी बहुत पुराना (संभवतः गुर्जर-प्रतिहार काल का) हो सकता है।
कहा जाता है कि एक बार तीर्थयात्रियों का एक समूह इस रास्ते से गुजर रहा था। वे अपने साथ भगवान लक्ष्मण की एक मूर्ति लेकर चल रहे थे। थकान मिटाने के लिए वे परमेश्वर ताल के पास एक पीपल के पेड़ के नीचे रुक गए और मूर्ति को वहीं रख दिया।
अगली सुबह जब उन्होंने मूर्ति उठाने की कोशिश की, तो वह अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई। कई प्रयासों के बाद भी जब मूर्ति नहीं हिली, तो इसे ईश्वर का संकेत माना गया और वहीं पर एक मंदिर का निर्माण कर दिया गया।
मंदिर के गर्भगृह में शेषनाग की भी एक प्रमुख मूर्ति है।
यहाँ भगवान लक्ष्मण के अलावा राधा-कृष्ण और भगवान शिव के छोटे मंदिर भी हैं।
2. शहजादी का रोज़ा
यह स्मारक भी परमेश्वर ताल के पास ही स्थित है और यह अपनी बेहतरीन वास्तुकला के साथ-साथ एक अधूरी प्रेम कहानी के लिए जाना जाता है यह 15वीं शताब्दी (सल्तनत काल) में बनी एक इमारत है। हालांकि इसके निर्माण की सटीक तारीख कहीं दर्ज नहीं है, लेकिन इसकी शैली और बनावट इसे मालवा सुल्तानों के समय का बताती है। यह एक मकबरा है जो किसी अज्ञात राजकुमारी (शहजादी) को समर्पित है। चंदेरी के एक गवर्नर (हाकिम) की बेटी मेहरुन्निसा को अपनी सेना के एक प्रमुख सेनापति से प्यार हो गया था। शहजादी के पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने सेनापति को मारने का षड्यंत्र रचा और उसे एक युद्ध में भेज दिया, यह सुनिश्चित करते हुए कि वह वहां से जीवित न लौटे। लेकिन सेनापति युद्ध जीतकर घायल अवस्था में वापस आ गया। वह मुश्किल से परमेश्वर ताल के पास पहुँचा और वहीं गिरकर उसकी मृत्यु हो गई।जब शहजादी को यह खबर मिली, तो वह दौड़ती हुई वहाँ आई और अपने प्रेमी के वियोग को सहन न कर पाने के कारण उसने भी वहीं अपने प्राण त्याग दिए (कहा जाता है कि उसने आत्महत्या कर ली)। बाद में, पछतावे में आकर उसके पिता ने उन दोनों को एक ही जगह दफनाया और यह सुंदर मकबरा बनवाया।
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