जा रहे थे मुझे मुड़कर भी ना देखा तुमने | क्या ज़रूरी था खेसारे पर खसारा करना
Автор: Mohammad Sharique Adab-e-Urdu
Загружено: 2026-01-13
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“जा रहे थे मुझे मुड़कर भी ना देखा तुमने,
क्या ज़रूरी था खेसारे पर खसारा करना…”
इस दर्द भरी पंक्ति ने पूरी महफ़िल को खामोश कर दिया।
अल्फ़ाज़ सीधे दिल पर असर करते हैं और
जुदाई की कसक हर श्रोता को महसूस होती है।
यह शायरी उन जज़्बातों को बयान करती है
जहाँ शिकायत भी है, दर्द भी है
और एक सच्चे रिश्ते की टीस भी।
लाइव मुशायरे में इस कलाम पर
हर तरफ़ सन्नाटा और फिर ज़ोरदार तालियाँ सुनाई दीं।
यह वीडियो उन लोगों के लिए है
जो सच्ची, दर्द भरी और दिल को छू लेने वाली शायरी पसंद करते हैं।
Mohammad Sharique Adab-e-Urdu
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