विदेशी धरती पर देसी संघर्ष! 90s के वो मज़ेदार अनुभव जब पसीने छूट गए थे | बिना Google वाला अमेरिका!
Автор: Atul Arora presents झाड़े रहो कलक्टरगंज
Загружено: 2025-12-27
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नमस्ते दोस्तों! आज हमारे YouTube चैनल का पहला जन्मदिन है और इस खास मौके पर हम शुरू कर रहे हैं एक बहुत ही दिलचस्प ज़ूम सीरीज: 'Life In an HOV Lane'। 🎂🎉
क्या आपने कभी सोचा है कि 90 के दशक या साल 2000 की शुरुआत में जब न Google था, न Facebook और न ही हाथ में सेलफोन, तब विदेशी धरती पर पहली बार उतरने पर क्या बीतती होगी?
जब एयरपोर्ट पर कैब वाला न मिले, रेस्टोरेंट में वेजिटेरियन खाना माँगने के लिए जद्दोजहद करनी पड़े, या अनजाने में पुलिस के हत्थे चढ़ने पर उसे 'कानपुर-लखनऊ' वाले अंदाज़ में समझाने की कोशिश की जाए—ये स्थितियाँ या तो आपको रुला सकती हैं या फिर ताउम्र के लिए एक बेहतरीन 'हास्य-व्यंग्य' बन सकती हैं। 😅
इस वीडियो में क्या है खास:
✅ दिग्गज मेहमान: कविता और हास्य-व्यंग्य की दुनिया के जाने-माने नामचीन साहित्यकार और मित्र।
✅ असली कहानियाँ: नई ज़मीन पर ज़िदगी की 180 डिग्री शुरुआत के मज़ेदार और अजीबोगरीब अनुभव।
✅ साहित्यिक गपशप: ज़ूम पर हुई एक अनौपचारिक और आत्मीय बातचीत।
यह प्लेलिस्ट उन यादों का एक वीडियो रूपांतरण है जिन्हें मैंने साल 2000 में एक ब्लॉग के रूप में शुरू किया था। आशा है कि आपको यह बातचीत और यह नई पहल पसंद आएगी। अपना स्नेह और आशीर्वाद (Like & Subscribe) ज़रूर दें! 🙏
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