सीता गीत - पड़ी है धूप से गर्मी लगी है प्यास अतिभारी कार्यक्रम हेतु संपर्क सूत्र 8447921265
Автор: Jagmohan Rawat chaundkoti
Загружено: 2020-12-30
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Lyrics - पडी है धूप से गर्मी लगी है प्यास अति भारी
कहीं छाया नहीं दीखे मैं चलती नाथ अब हारी.
पडे पैरो मे हाय छाले हुए काटों से खुनजारे
सूखे है होंठ हाय स्वामी मैं तड़पू प्यास के मारी
कहां होगा लखन पानी मुझे पानी पीला दीजो
करो अब खोज जल्दी से जो है सीता तुम्हें प्यारी
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