विदाई माने क्या? पिता का घर पराया कैसे? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2023)
Автор: शक्ति
Загружено: 2024-03-20
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वीडियो जानकारी: 14.01.2023, वेदांत महोत्सव, गोवा
विदाई माने क्या? पिता का घर पराया कैसे? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2023)
📋 Video Chapters:
0:00 - Intro
2:39 - महिलाओं की स्थिति और विदाई में उनके घर छोड़ने के कारणों पर चर्चा
21:10 - माता-पिता की सोच अपनी बेटी को ले कर और समाज की दवाव
29:15 - लड़कियों की शादी, दहेज और हत्या जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा
38:24 - शादी और बुढ़ापे की चिंता
46:12 - माता-पिता लड़की की भ्रूण हत्या क्यों करते है?
51:41 - दहेज हत्या और भ्रूण हत्या से जुड़ी कुछ आँकड़े
59:17 - समापन
विवरण:
इस वीडियो में आचार्य जी ने भारतीय समाज में विवाह और विदाई की परंपराओं पर गहन चर्चा की है। उन्होंने यह सवाल उठाया है कि क्यों महिलाएं अपने माता-पिता का घर छोड़कर विवाह के बाद नए घर में चली जाती हैं, जबकि यह एक कठिन और भावनात्मक प्रक्रिया होती है। आचार्य जी ने विदाई के समय होने वाले आंसुओं और भावनाओं को नाटक करार दिया और यह बताया कि यह सब सामाजिक दबाव और परंपराओं के कारण होता है। उन्होंने यह भी कहा कि विवाह के बाद महिलाओं को अक्सर अपने पति और ससुराल वालों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनकी स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान प्रभावित होता है।
आचार्य जी ने यह भी बताया कि समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए जरूरी है कि हम इन परंपराओं पर सवाल उठाएं और उन्हें बदलने का प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा कि विवाह का उद्देश्य केवल सामाजिक मान्यता नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक स्वस्थ और समान संबंध होना चाहिए।
प्रसंग:
~क्या विवाह के बाद महिलाओं को अपने माता-पिता का घर छोड़ना अनिवार्य है?
~विदाई के समय आंसू क्यों बहाए जाते हैं? क्या यह सच में भावनात्मक है?
~क्या समाज में विवाह की परंपराएँ महिलाओं की स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं?
~क्या विवाह केवल सामाजिक मान्यता का एक साधन है?
~महिलाओं को अपने पति और ससुराल वालों पर निर्भर रहने की आवश्यकता क्यों होती है?
~क्या विदाई के गीतों में छिपा संदेश वास्तव में सकारात्मक है?
~क्या हमें पारंपरिक विवाह प्रथाओं पर सवाल उठाने की आवश्यकता है?
~क्या विवाह के लिए सामाजिक दबाव को खत्म किया जा सकता है?
~क्या विवाह का उद्देश्य केवल बच्चों का जन्म देना है?
~क्या एक स्वस्थ और समान संबंध की परिभाषा बदलनी चाहिए?
संगीत: मिलिंद दाते
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