श्री राज–श्यामा जी की नीलो–पीलो मंदिर में नूरी सुखसेज लीला।DAY :-13
Автор: Nijdham
Загружено: 2025-11-29
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श्री राज जी और श्री श्यामा जी नीलो–पीलो मंदिर की सुख–सेज्या पर नूरी आभा में आलोकित विराजमान हैं।
उनके चारों ओर सखियाँ जुदे–जुदे टोलों में बैठी प्रेम–संगीत, हँसी और मधुर वार्तालाप में रमी हुई हैं।
किसी सखी के हाथ में चंदन थाल है, कोई गुलाब के पंखुड़ियों से सेज सजा रही है,
तो कोई नूरी दीपों में तेल भर रही है।
चारों ओर सुखपाल खड़े हैं — कोमल भाव से साज-संभाल में लगे हुए।
क्षणभर बाद, श्री राज–श्यामा जी का भाव वन–विहार की ओर उठता है।
सखियाँ सज-संवरकर सुखपालों सहित वन की ओर चल पड़ती हैं —
जहाँ वृक्षों पर नूर के फूल, ताल किनारे हीरक तरंगें,
और हवा में माधुर्य व प्रेम की गंध फैली हुई है।
वन में पहुँचकर सब रमन करते हैं —
कोई फूल चुनती, कोई ताल के जल में कमल तोड़ती,
और श्री राज–श्यामा जी हँसते हुए सखियों से प्रेम–संवाद कर रहे हैं।
पूरा दृश्य नूर की उज्ज्वलता, भक्ति की गहराई और अनंत प्रेम–रस से भरा हुआ है।
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