चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं ..... । गीता | कर्मणाजाति का शास्त्रीय खण्डन
Автор: !! श्रुतिमार्ग !!
Загружено: 2026-01-21
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यह वीडियो भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक “चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं” पर आधारित एक पूर्ण शास्त्रार्थ है।
📌 इस व्याख्यान में आप जानेंगे —
• “चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं” का शुद्ध शब्दार्थ
• “विभागशः” का सही व्याकरणिक अर्थ (सहित, न कि अनुसार)
• “सृष्टम्” का वास्तविक तात्पर्य (उत्पत्ति, न कि केवल विभाजन)
• शंकराचार्य का गीता मूल भाष्य
• पद्मपाद, आनन्दगिरि और वाचस्पति मिश्र की प्रामाणिक टीकाएँ
• क्यों गीता से कर्मजातिवाद सिद्ध नहीं होता
• गीता–श्रुति–स्मृति का पूर्ण समन्वय
• पूर्वमीमांसा और न्याय से अंतिम निर्णय
यह व्याख्यान शंकराचार्य के मूल भाष्य, उनकी परम्परा की टीकाओं,
पाणिनीय व्याकरण, निरुक्त, तथा पूर्वमीमांसा–न्याय के आधार पर
कर्म से जाति सिद्ध करने वाली भ्रान्त व्याख्याओं का निर्णायक खण्डन करता है।
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