चंपावत के न्याय देवता गोलू देव (गोल्ज्यू)मंदिर🙏संदीप ने कई विषयों पर अपने विचार दिए
Автор: DEEPALI RAUTELA NAYAL
Загружено: 2026-01-12
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चंपावत का गोलू देवता मंदिर न्याय और निष्पक्षता के प्रतीक, गोलू देवता को समर्पित है, जिनकी लोककथाएं उन्हें एक कत्यूरी राजकुमार बताती हैं, जिन्हें सौतेली माँ के षड्यंत्र के कारण नदी में फेंक दिया गया था, लेकिन वे बच गए और बाद में न्याय के देवता के रूप में पूजे जाने लगे, और उनके मंदिर में भक्त मन्नतें पूरी होने पर घंटियाँ चढ़ाते हैं और लिखित याचिकाएं देते हैं, जो उन्हें त्वरित न्याय के लिए जाना जाता है।
गोलू देवता की कथा (लोकप्रिय मान्यता)
जन्म और षड्यंत्र: गोलू देवता का जन्म एक कत्यूरी राजा के राजकुमार के रूप में हुआ था। उनकी सौतेली माताओं ने ईर्ष्यावश, जन्म के समय उन्हें नदी में डुबोने की साजिश रची, लेकिन वे बच गए और एक मछुआरे द्वारा पाले गए।
न्यायप्रिय युवक: बड़े होने पर वे एक ईमानदार और न्यायप्रिय युवक बने। उन्होंने राज्य में लौटकर अपनी सौतेली माताओं के दुष्ट कृत्यों का पर्दाफाश किया, जिसके बाद उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया।
न्याय के देवता: अपनी निष्पक्षता और न्यायप्रिय स्वभाव के कारण, उन्हें न्याय के देवता के रूप में पूजा जाने लगा और उन्हें 'ग्वाल देवता' भी कहा जाता है।
चंपावत में गोलू देवता का महत्व
जन्मस्थान: चंपावत को गोलू देवता का जन्मस्थान माना जाता है।
न्याय का दरबार: ऐसा माना जाता है कि गोलू देवता आज भी अपने सफेद घोड़े पर सवार होकर भ्रमण करते हैं और लोगों की समस्याएं सुनते हैं, जिसे 'गोलू दरबार' कहा जाता है।
प्रतीक: मंदिर परिसर में हजारों घंटियाँ देखी जा सकती हैं, जो भक्तों द्वारा मन्नतें पूरी होने पर चढ़ाई जाती हैं। भक्त अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लिखित याचिकाएं भी देते हैं।
अन्य मंदिर: गोलू देवता के कई पीठ हैं, जिनमें घोड़ाखाल, चितई और डाना गोलू प्रमुख हैं, लेकिन चंपावत का मंदिर उनके जन्मस्थान के रूप में महत्वपूर्ण है।
पूजा और मान्यता
उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है और वे कुमाऊं क्षेत्र में इष्टदेव के रूप में पूजे जाते हैं।
भक्त "जय न्याय देवता गोलज्यू तुमार जय हो। सबुक लीजे दैं हैजे" (न्याय के देवता गोलज्यू की जय हो! सभी के लिए आशीर्वाद) मंत्र का जाप करते हैं।
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Abbott Mount भारत के चंपावत जिलेमें स्थित एक शांत पहाड़ी स्थल, एबॉट माउंट की स्थापना 20वीं शताब्दी की शुरुआत में ब्रिटिश व्यवसायी जॉन हेरोल्ड एबॉट नेएक शांतिपूर्ण विश्राम स्थल के रूप में की थी , जिसका नाम उन्होंने अपने नाम पर रखा था। इसमें 13 औपनिवेशिक कॉटेज और एक चर्च है, जो हिमालयी दृश्यों, प्रकृति की सैर और अपने प्रसिद्ध "भूतिया" मुक्ति कोठी अस्पताल के लिए जाना जाता है, जिसमें एक डॉक्टर के प्रयोगों की डरावनी कहानियां प्रचलित हैं, जो अछूते औपनिवेशिक आकर्षण और प्राकृतिक सुंदरता और रहस्य का एक अनूठा मिश्रण प्रदान करता है।
प्रमुख ऐतिहासिक पहलू
खोज और नामकरण: जॉन हेरोल्ड एबॉट ने इस स्थान की खोज की और झोपड़ियाँ बनवाईं, तथा इस क्षेत्र का नाम अपने नाम पर रखा।
औपनिवेशिक बस्ती: एबॉट का उद्देश्य एक शांत यूरोपीय बस्ती बनाना था, जिसके लिए उन्होंने आकर्षक पुराने बंगलों और एक पत्थर के चर्च का निर्माण किया जो आज भी मौजूद हैं।
"भूतिया" अस्पताल:यह स्थल मुक्ति कोठी नामक अस्पताल के लिए कुख्यात हुआ , जहां कथित तौर पर डॉ. मॉरिस ने असाध्य रोग से ग्रसित रोगियों पर भयावह प्रयोग किए थे, जिसके कारण भूत-प्रेत की कहानियां प्रचलित हुईं जो इसके रहस्य को और बढ़ाती हैं।
प्रमुख विशेषताऐं
मनमोहक दृश्य: नंदा देवी, त्रिशूल और नंदा कोट जैसी हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है।
औपनिवेशिक वास्तुकला: इसमें ब्रिटिश काल की इमारतों को संरक्षित किया गया है, जिनमें पुराना चर्च (जो ज्यादातर बंद रहता है) और कॉटेज शामिल हैं।
प्रकृति और वन्यजीव: हिमालयी पक्षियों, तितलियों और रोडोडेंड्रोन (बुरान) फूलों से समृद्ध।
अद्वितीय क्रिकेट पिच: यह वह स्थान है जहां दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा क्रिकेट मैदान होने का दावा किया जाता है।
शांति: यह क्षेत्र काफी हद तक गैर-व्यावसायिक बना हुआ है, जिससे यहां का शांत और अछूता माहौल बरकरार है, हालांकि सोशल मीडिया ने पर्यटकों की रुचि बढ़ा दी है।
उत्तराखंड के चंपावत जिले में लोहाघाट के पास स्थित एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र है, जिसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद के कहने पर हुई थी और यह 'प्रबुद्ध भारत' पत्रिका का प्रकाशन केंद्र भी है, जो शांत वातावरण और अद्वैत वेदांत के अध्ययन के लिए जाना जाता है, यहाँ भोजन और आवास की सुविधा भी उपलब्ध है।
मुख्य जानकारी:
स्थान: चंपावत जिले के लोहाघाट से लगभग 9 किमी दूर, ऊँचाई पर स्थित है।
स्थापना: स्वामी विवेकानंद के शिष्यों द्वारा 1899 में की गई।
उद्देश्य: अद्वैत वेदांत के अध्ययन और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित है।
विशेषताएँ:
'प्रबुद्ध भारत' पत्रिका का प्रकाशन केंद्र।
स्वामी विवेकानंद ने यहाँ निवास किया और शिक्षा दी।
आश्रम में एक पुस्तकालय और एक छोटा संग्रहालय है।
आगंतुकों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था है।
एक धर्मार्थ अस्पताल भी संचालित होता है।
वातावरण: शांत, प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर और हिमालय के मनोरम दृश्यों वाला स्थान, जो आध्यात्मिकता के लिए आदर्श है।
कैसे पहुँचें (संक्षिप्त):
रेल: काठगोदाम, लालकुआं, रुद्रपुर या टनकपुर तक ट्रेन से आएं।
सड़क मार्ग: वहाँ से टैक्सी या कार किराए पर लेकर मायावती पहुँचें (टनकपुर से लगभग 3 घंटे)।
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