Rudrashtakam | रुद्राष्टकम | Namami shameshan nirvan Rupm | गोस्वामी तुलसीदास | Shiv Mantra | Bhajan
Автор: SOLUTION
Загружено: 2025-12-28
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Rudrashtakam | रुद्राष्टकम | Namami shameshan nirvan Rupm | गोस्वामी तुलसीदास | Shiv Mantra | Bhajan
Rudrashtakam is a part of holy book "Ramcharit manas"
It was composed by the poet Goswami Tulsidas ji
रुद्राष्टकम पवित्र पुस्तक रामचरित मानस के उतर कांड से उद्धृत है इसकी रचना कवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने किया था।
।। इसमें स्वर- स्वर्गीय श्रीमान मृत्यंजय हिरेमठ जी का है।।
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गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रुद्राष्टकम (रामचरितमानस, उत्तरकांड) का पूरा पाठ और उसका सरल हिंदी अर्थ यहाँ दिया गया है:
श्री रुद्राष्टकम (अर्थ सहित)
1. मंगलाचरण
नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥
अर्थ: हे मोक्षस्वरूप, विभु, व्यापक, ब्रह्म और वेदस्वरूप ईशान दिशा के ईश्वर! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। जो निज स्वरूप में स्थित, गुणों से रहित, भेदरहित, इच्छारहित, चेतन आकाश रूप और आकाश को ही वस्त्र के रूप में धारण करने वाले हैं, उन दिगंबर शिव को मैं भजता हूँ।
2. स्वरूप वर्णन
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं, गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्।
करालं महाकाल कालं कृपालं, गुणागार संसारपारं नतोऽहम्॥
अर्थ: जो निराकार हैं, ओंकार के मूल हैं, तुरीय (तीनों गुणों से परे) हैं, वाणी, ज्ञान और इंद्रियों से अतीत हैं, कैलाशपति हैं, भयानक हैं, महाकाल के भी काल और कृपालु हैं, जो गुणों के धाम हैं और संसार से पार उतारने वाले हैं, उन परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ।
3. सौंदर्य वर्णन
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा, लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥
अर्थ: जो हिमालय के समान श्वेत वर्ण के और गंभीर हैं, जिनके शरीर की आभा करोड़ों कामदेवों के समान है, जिनके मस्तक पर सुंदर गंगा जी बह रही हैं, जिनके ललाट पर द्वितीय का चंद्रमा और गले में सर्पों की माला सुशोभित है।
4. आभूषण और तेज
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥
अर्थ: जिनके कानों में कुंडल हिल रहे हैं, सुंदर भृकुटी और विशाल नेत्र हैं, जिनका मुख प्रसन्न और कंठ नीला है, जो दयालु हैं। जो बाघ की खाल का वस्त्र और मुंडों की माला पहनते हैं, उन सबके नाथ और सबके प्रिय श्री शंकर को मैं भजता हूँ।
5. वीरता और शक्ति
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥
अर्थ: जो प्रचंड, श्रेष्ठ, तेजस्वी, परमेश्वर, अखंड, अजन्मे और करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाश वाले हैं। जो तीनों प्रकार के दुखों (त्रिशूल) को जड़ से उखाड़ देने वाले हैं और हाथ में त्रिशूल धारण किए हुए हैं, उन प्रेम के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी (पार्वती) के पति को मैं भजता हूँ।
6. स्तुति
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानन्द संदोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥
अर्थ: जो कलाओं से परे, कल्याण स्वरूप और प्रलय करने वाले हैं, जो सदा सज्जनों को आनंद देते हैं और त्रिपुर के शत्रु हैं। जो सच्चिदानंद स्वरूप और मोह को हरने वाले हैं, हे कामदेव के शत्रु प्रभु! मुझ पर प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए।
7. भक्ति की प्रार्थना
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं, प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम्॥
अर्थ: जब तक मनुष्य पार्वती के पति (आपके) चरण कमलों को नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इस लोक में और न ही परलोक में सुख-शांति मिलती है और न ही उनके कष्टों का नाश होता है। अतः हे समस्त जीवों के हृदय में निवास करने वाले प्रभु! मुझ पर प्रसन्न होइए।
8. समर्पण
न जानामि योगं जपं नैव पूजां, नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम्।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो॥
अर्थ: मैं न तो योग जानता हूँ, न जप और न ही पूजा। हे शम्भो! मैं तो सदा-सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ। हे प्रभु! बुढ़ापे और जन्म-मृत्यु के दुखों से तपे हुए मुझ दुखी की दुखों से रक्षा कीजिए। हे शम्भो! मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
9. फलश्रुति
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति॥
अर्थ: भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए ब्राह्मण द्वारा कहा गया यह रुद्राष्टक जो भी मनुष्य भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर भगवान शंकर अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
इस स्तुति का ट्युन संगीत के सरस्वती लता मंगेशकर जी के गाए हुए फिल्मी गीत...तुम्ही मेरी मंदिर तुम्ही मेरी पूजा से लिया गया है इसका श्रेय उन्हीं को जाता है
रुद्राष्टकम
नमामि शमीशान निर्वाण रूपं
स्वर : RV
संगीत : RV
हमारा यूट्यूब चैनल RV प्रतिबद्ध है आप सबों के बीच एक से बढ़कर एक भजन श्लोकादि परोसते रहने के लिए..
बस इसी तरह से अपना प्यार आशीर्वाद बनाए रखियेगा
अपनी पसंद का गीत स्तुति आदि कोई मुझसे गवाना चाहते हैं तो
जो भी रूद्राष्टकम को पसंद करते है सबों को दिल से धन्यवाद साधुवाद यथायोग्य प्रणामाशिष
हर हर महादेव
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