अपने मन को कहां लगा कर रखना चाहिए? मन को ठीक कैसे करें? सदगुरु श्री अभिलाष साहेब जी
Автор: KABIR KA ADHYATMA
Загружено: 2025-10-20
Просмотров: 6270
मनुष्य का मन बहुत चंचल है, वह कभी एक जगह टिकता नहीं। यदि मन को सही दिशा न दी जाए, तो वह इधर-उधर भटककर दुख, मोह और भ्रम में फँस जाता है। इसलिए जरूरी है कि मन को सही स्थान पर लगाया जाए — ऐसे स्थान पर जहाँ से शांति, स्थिरता और सच्चा सुख मिले।
मन को आत्मा और सद्गुरु के चरणों में लगाना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। जब मन आत्मा की ओर मुड़ता है, तो उसमें पवित्रता और प्रकाश आने लगता है। संसार की वस्तुओं में मन लगाने से केवल क्षणिक आनंद मिलता है, परंतु आत्मा में लगने से अविनाशी सुख प्राप्त होता है।
मन को लगाकर रखने का सबसे अच्छा तरीका है ध्यान और सत्संग। जब आप दिनभर में कुछ समय अपने भीतर की आवाज़ सुनने और आत्मा का स्मरण करने में देते हैं, तब मन धीरे-धीरे शांत और संतुलित होने लगता है।
संत कबीर साहेब जी ने कहा है —
"मन लागो मेरो यार फकीरी में।"
अर्थात्, मन को उस मार्ग में लगाओ जहाँ लोभ, मोह और अहंकार न हो — जहाँ केवल प्रेम, भक्ति और सत्य का निवास हो।
इसलिए अपने मन को संसार की माया में नहीं, बल्कि सत्य और प्रेम में लगाकर रखें। यही जीवन का सबसे सुंदर मार्ग और स्थायी सुख का सच्चा आधार है।
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: