अखंड राम नाम का रहस्य राम नाम की परिपक्व साधना
Автор: हरे कृष्ण हरे राम
Загружено: 2026-01-13
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राम नाम की साधना जब परिपक्व होती है, तब वह केवल जप नहीं रहती—वह साधक का स्वभाव बन जाती है। इस अवस्था में करुणा स्वतः प्रकट होती है, सेवा कर्तापन के बिना बहने लगती है और जीवन स्वयं साधना-भूमि बन जाता है। साधक संसार से भागता नहीं, बल्कि संसार के प्रति उत्तरदायी होकर गृहस्थ-संत की अवस्था में जीता है।
इस वीडियो में राम नाम की उसी गूढ़ परिपक्वता का वर्णन है, जहाँ दृष्टि बदलते ही परिस्थितियाँ बदल जाती हैं, भय विलीन हो जाता है और मृत्यु भी परिवर्तन मात्र प्रतीत होती है। साधक न अतीत से बंधा रहता है, न भविष्य से विचलित—वह वर्तमान की सघन उपस्थिति में आनंदित होता है।
राम नाम का प्रभाव साधक के चारों ओर शांति का अदृश्य क्षेत्र रच देता है, जहाँ बिना बोले भी संतुलन फैलता है। जीवन सरल, सहज और मौन हो जाता है। न कुछ पाने की आकांक्षा, न कुछ छोड़ने का आग्रह—केवल स्वीकार, सजगता और पूर्णता।
यह वीडियो उन साधकों के लिए है जो राम नाम को केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन की धड़कन बनाना चाहते हैं। यहाँ राम नाम जप नहीं, स्मरण भी नहीं—स्वभाव बन जाता है। यही राम नाम का अखंड विस्तार है, जहाँ आरंभ और अंत दोनों लुप्त हो जाते हैं।
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