पवित्र यूखरिस्त की शिक्षा सुनकर प्रभु येसु के शिष्यों ने उन्हें क्यों छोड़ा दिया? योहन 6 का अध्ययन
Автор: Greater Glory of God
Загружено: 2026-01-25
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योहन रचित सुसमाचार अध्याय 6 के अंतिम भाग (59-71) में हम देखते हैं कि प्रभु येसु के कई शिष्य उनकी शिक्षा को सुनकर चौंक गए और उन्हें छोड़कर चले गए। लेकिन येसु ने अपनी शिक्षा को नहीं बदला, क्योंकि वे पवित्र यूखरिस्त की वास्तविक उपस्थिति की सच्चाई को स्पष्ट कर रहे थे।
🔹 क्या कारण था कि इतने सारे शिष्यों ने प्रभु येसु का साथ छोड़ दिया?
🔹 येसु ने क्यों कहा कि बिना पिता की कृपा के कोई उनके पास नहीं आ सकता? (योहन 6:65)
🔹 "आत्मा ही जीवन प्रदान करता है, मांस से कुछ लाभ नहीं होता। मैंने तुम्हे जो शिक्षा दी है, वह आत्मा और जीवन है।" (योहन 6:63) – इस कथन का क्या अर्थ है?
🔹 पवित्र यूखरिस्त की शिक्षा पर येसु ने कोई समझौता क्यों नहीं किया?
इस अध्ययन में हम समझेंगे कि कैसे योहन 6:59-71 कैथोलिक कलीसिया की पवित्र यूखरिस्त में येसु की वास्तविक उपस्थिति की शिक्षा को पूरी तरह से समर्थन देता है। जो लोग इस सत्य को स्वीकार नहीं कर सके, वे येसु को छोड़कर चले गए। लेकिन पेत्रुस ने येसु से कहा, "प्रभु! हम किसके पास जायें! आपके ही शब्दों में अनन्त जीवन का सन्देश है!" (योहन 6:68)
आइए गहराई से जानें कि प्रभु येसु की यह शिक्षा हमारे विश्वास के लिए कितनी महत्वपूर्ण है और हम इसे अपने जीवन में कैसे आत्मसात कर सकते हैं।
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