अंदर की वह आवाज़ जो कभी बंद नहीं होती... जानिए क्या है 'शब्द' का भेद?
Автор: Jaigurudev Inspires India
Загружено: 2026-01-15
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जय गुरुदेव! 🙏
क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम बाहरी दुनिया के शोर से दूर, अपनी आँखें और कान बंद करते हैं, तब भी हमारे अंदर एक अजीब सी हलचल या सन्नाटा क्यों महसूस होता है? महापुरुष फरमाते हैं कि हमारे भीतर एक ऐसी 'दिव्य ध्वनि' (Shabd/Naam) निरंतर गूँज रही है, जो सृष्टि के बनने से पहले भी थी और अंत के बाद भी रहेगी।
आज के इस विशेष सत्संग सारांश में, परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज उस 'शब्द' का भेद खोल रहे हैं जिसे वेद, पुराण और संतों की वाणियों में 'आकाशवाणी' या 'अनहद नाद' कहा गया है।
इस वीडियो में आप जानेंगे:
वह कौन सी आवाज़ है जो २४ घंटे हमारे अंदर हो रही है?
जीवात्मा इस शरीर रूपी 'किराये के मकान' में क्यों और कैसे फँस गई?
कर्मों का भारी पर्दा हमारी रूहानी आँखों के सामने कैसे आ गया है?
संतों की दया से हम अपने 'निज घर' (सतलोक) वापस कैसे जा सकते हैं?
यह वीडियो मात्र एक जानकारी नहीं, बल्कि अपनी आत्मा को पहचानने की एक छोटी सी कोशिश है। यदि आप भी उस मालिक की खोज में हैं, तो बाबा जी के इन वचनों को अंत तक जरूर सुनें।
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