अर्जुन ने लिया बदला: युधिष्ठिर के अपमान का जवाब देते हुए कर्ण का वध |श्री कृष्ण महिमा
Автор: Shree Krishna
Загружено: 2025-03-21
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युधिष्ठिर अपनी हार से अपमानित हो कर शिविर में आ जाता है और नकुल सहदेव को कहता है की मुझे कर्ण के वध होने की प्रतीक्षा है जैसे ही उसका वध हो जाता है मुझे बता देना। युधिष्ठिर कर्ण से हार कर अपमानित हो अपने शिविर में जा कर बैठ गया है यह बात सुन अर्जुन कर्ण से युद्ध करने के लिए जाने के लिए श्री कृष्ण को कहता है तो श्री कृष्ण उसे पहले युधिष्ठिर से मिलन के लिए कहते हैं। अर्जुन जब युधिष्ठिर के पास जाता है तो वह उसे कर्ण का वध करने के लिए कहता है। श्री कृष्ण वहाँ आकर अर्जुन और युधिष्ठिर दोनों को कर्ण से हर जाने की बात से निराश होने से मना करते हैं और युद्ध में जाकर उसका सामना करने के लिए कहते हैं। युधिष्ठिर जब कर्ण से हार जाता है तो अर्जुन कर्ण से उसका बदला लें के लिए युद्ध में आता है। दोनों में युद्ध शुरू हो जाता है। दोनों एक दूसरे के अस्त्रों का उचित अस्त्रों से जवाब देते हैं। कर्ण अर्जुन पर भारी पड़ता है और अर्जुन को घायल कर देता है। कर्ण के बहुत से बाँ अर्जुन की ओर जाते और अर्जुन के रथ पर लगी हनुमान जी की मूर्ति में जा समा जाते हैं। अर्जुन पर कर्ण नाग अस्त्र का प्रयोग करता है। जिस पर अश्वसेन नाग बैठ कर अर्जुन की ओर वार करने चल पड़ता है। श्री कृष्ण कर्ण के बाण से अर्जुन को बचाने के लिए रथ को ज़मीन में धँसा देते हैं और कर्ण का बाण अर्जुन के मुकुट से टकरा जाता है। श्री कृष्ण अर्जुन को अश्वसेन सर्प के बारे में बताते हैं और उसे मारने के लिए कहते हैं अर्जुन सर्प को मार देता है।
अर्जुन और कर्ण में दुबारा युद्ध शुरू हो जाता है। कर्ण अर्जुन से लड़ने के लिए जैसे ही अपने सारथी को रथ अर्जुन के ओर नज़दीक ले जाने के लिए कहता है तो उसका रथ का पहिया धँस जाता है। और उसे एक ऋषि द्वारा दिए गए श्राप की याद आ जाती है की जब उसने गलती से एक ऋषि की गाय को मार दिया था तो उस ऋषि ने कर्ण को श्राप दिया था की जब तू अपने परम शत्रु से युद्ध करेगा तो युद्ध करते समय तेरे रथ का पहिया ज़मीन में धँस जाएगा। कर्ण अर्जुन को अपने मायावी बाण की शक्ति से उलझा कर अपने रथ का पहिया निकलने के लिए रथ से उतर जाता है और अपना धनुष रख कर रथ का पहिया निकलने की कोशिश करता है। अर्जुन कर्ण के दिव्य बाण को नष्ट कर देता है और कर्ण उसे देख जैसे ही उसपे बाण चलाने की कोशिश करता है उसके दिव्य अस्त्र प्रकट नहीं होते क्योंकि उसे परशुराम जी का श्राप था की उसे समय पड़ने पर उसकी शक्ति काम नहीं करेगी। कर्ण फिर से अपना धनुष रख कर पहिया निकलता है तभी अर्जुन उस पर वार कर देता है। कर्ण अर्जुन को धुतकारता है की तुमने निहत्थे शत्रु पर वार किया। श्री कृष्ण को भी वह बर कहता हिया की तुमने अपने शिष्य को अधर्म से युद्ध करने की शिक्षा क्यों दी। श्री कृष्ण कर्ण को उसकी गलती के बर में बताते हैं। श्री कृष्ण अर्जुन को कर्ण पर हमला कर उसे मारने के लिए कहते हैं। अर्जुन श्री कृष्ण के आदेश से कर्ण पर हमला कर देता है और निहत्था कर्ण मारा जाता है। कर्ण की मृत्युु से दुर्योधन और शकुनि को धक्का लगता है। कर्ण के वध के बाद युद्ध रुक जाता है और कर्ण की आत्मा सूर्य देव में जाकर समा जाती है। कर्ण के वध के बाद अर्जुन युधिष्ठिर को ये समाचार सुनाता है। कुंती को कर्ण की मृत्युु से दुःख होता है।
श्रीकृष्णा, रामानंद सागर द्वारा निर्देशित एक भारतीय टेलीविजन धारावाहिक है। मूल रूप से इस श्रृंखला का दूरदर्शन पर साप्ताहिक प्रसारण किया जाता था। यह धारावाहिक कृष्ण के जीवन से सम्बंधित कहानियों पर आधारित है। गर्ग संहिता , पद्म पुराण , ब्रह्मवैवर्त पुराण अग्नि पुराण, हरिवंश पुराण , महाभारत , भागवत पुराण , भगवद्गीता आदि पर बना धारावाहिक है सीरियल की पटकथा, स्क्रिप्ट एवं काव्य में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ विष्णु विराट जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे सर्वप्रथम दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर प्रसारित 1993 को किया गया था जो 1996 तक चला, 221 एपिसोड का यह धारावाहिक बाद में दूरदर्शन के डीडी नेशनल पर टेलीकास्ट हुआ, रामायण व महाभारत के बाद इसने टी आर पी के मामले में इसने दोनों धारावाहिकों को पीछे छोड़ दिया था,इसका पुनः जनता की मांग पर प्रसारण कोरोना महामारी 2020 में लॉकडाउन के दौरान रामायण श्रृंखला समाप्त होने के बाद ०३ मई से डीडी नेशनल पर किया जा रहा है, TRP के मामले में २१ वें हफ्ते तक यह सीरियल नम्बर १ पर कायम रहा।
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