Shree Hanuman Chalisa
Автор: Kiara Music
Загружено: 2025-12-20
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Shree *हनुमान चालीसा (पूर्ण पाठ)*
*🔹 दोहा (प्रारंभिक प्रार्थना)*
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
*🔹 चौपाइयाँ (40 मुख्य श्लोक)*
1. जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
2. रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
3. महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
4. कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥
5. हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
6. संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥
7. बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
8. प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
9. सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
10. भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥
11. लाय संजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
12. रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
13. सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
14. सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
15. जम कुबेर दिगपाल जहां ते। सब बिदित है तुम्हरा महिमा ते॥
16. बिद्या बिनय सुभ सुख दायक। बिपति हरन सब सुख कर दायक॥
17. अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
18. राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
19. तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै॥
20. अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
21. और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
22. संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
23. जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
24. जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥
25. जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
26. तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥
27. पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
*🔹 दोहा (अंतिम प्रार्थना)*
॥ इति श्री तुलसीदासकृत हनुमान चालीसा सम्पूर्ण ॥
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