Beekeeping, madhumakkhi palan, मधुमक्खी पालन में कितना धन कमा सकेगे संपूर्ण जानकारी,शुरू से बाजार तक
Автор: khet kisan
Загружено: 2019-03-10
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Beekeeping, madhumakkhi palan, मधुमक्खी पालन में कितना धन कमा सकेगे संपूर्ण जानकारी,शुरू से बाजार तक
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किसान भाइयों अगर आप कोई व्यवसाय करना चाहते हैं। तो मधुमक्खी पालन आपके लिए एक बेहतर व्यवसाय हो सकता है।लेकिन शुरू करने से पहले हमारा ये विडियो जरूर देखें। इसमें आप के लिए काफ़ी कुछ जानकारी है।
सही समय
नवम्बर से फरवरी तक सरसों की पैदावार बहुतायत में होती है व यह समय इन क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है।
मधुमक्खी की किस्म:-
इटेलियन मधुमक्खी
इटेलियन मधुमक्खी पालन में प्रयुक्त मौन गृह में लगभग 20 से 22 हजार तक मधुमक्खियाँ होती हैं, जिनमें एक रानी मक्खी, कुछ सौ नर व शेष मधुमक्खियाँ होती हैं।
रानी मक्खी
यह लम्बे उदर व सुनहरे रंग की मधुमक्खी होती है जिसे आसानी से पहचाना जा सकता है।इसका जीवन काल लगभग तीन वर्ष का होता है।सम्पूर्ण छते में एक ही रानी होती है जो अंडे देने का कार्य करती है, जिनकी संख्या 2000 से 2500 प्रतिदिन होती है।यह दो प्रकार के अंडे देटी है, गर्भित व अगर्भित अंडे।इसके गर्भित अंडे से मादा व अगर्भित अंडे से नर मधुमक्खी विकसित होती है।युवा रानी, रानीकोष व विकसित होती हैं जिसमें 15-16 दिन का समय लगता है।
नर मधुमक्खी या ड्रोंस
नर मधुमक्खी गोल, काले उदर युक्त व डंक रहित होती हैं।यह प्रजनन कार्य सम्पन्न करती है व इस काल में बहुतायत में होती है। रानी मधुमक्खी से प्रजननोप्रांत नर मधुमक्खी मर जाती है, इसके तीन दिन पश्चात् रानी अंडे देने का कार्य प्रारंभ कर देती है।
मादा मधुमक्खी या श्रमिक
पूर्णतया विकसित डंक वाली श्रमिक मक्खी छते के समस्त कार्य संचालित करती है।इनका जीवनकाल 40-45 दिन का होता है।श्रमिक मक्खी छते से पैदा होने के तीसरे दिन से कार्य करना प्रारंभ कर देती है।मोम उत्पादित करना, रॉयल जेली श्रावित करना, छत्ता बनाना, छत्ते की सफाई करना, छत्ते का तापक्रम बनाए रखना, कोषों की सफाई करना, वातायन करना, भोजन के स्रोत की खोज करना, पुष्प- रस को मधु (शहद) संचित करना,चौकीदारी करना इत्यादि कार्य मादा या श्रमिक मधुमक्खी द्वारा किए जाते हैं
मधुमक्खी पालन के लिए उचित जगह का निर्धारण
ऐसे स्थान का चयन आवश्यक है जिसके चारों तरफ 2से 4 किमी. के क्षेत्र में पेड़-पौधे ज्यादा हों या फूलदार खेत हों ।जिनसे पराग व मकरंद अधिक समय तक उपलब्ध हो सके।
डब्बे के लिये स्थान समतल व पानी का उचित निकास होना चाहिए । डब्बों के पास का बाग़ या फलौद्यान अधिक घना नहीं होना चाहिए ताकि गर्मी के मौसम में हवा का आवागमन सुचारू हो सके।
जहाँ डब्बे स्थापित होना है, वह स्थान छायादार होना चाहिए।
वह स्थान दीमक व चीटियों से नियंतित्र होना आवश्यक है।
दो डब्बों के मध्य तीन से चार मीटर का फासला होना आवश्यक है, उन्हें पंक्ति में नहीं लगाकर बिखरे रूप में लगाना चाहिए।एक स्थान पर 50 से 100 डब्बे या बॉक्स स्थापित किये जा सकते हैं।
हर बॉक्स के सामने पहचान के लिए कोई खास पेड़ या निशानी लगनी चाहिए ताकि मधुमक्खी अपने ही बॉक्स में प्रवेश करें।
बॉक्स को मोमी पतंगे के प्रकोप से बचाने के उपाय किए जाने चाहिए।
निरीक्षण के सयम यह ध्यान देना चाहिए कि बॉक्स में नमी तो नहीं है अन्यथा उसे धुप दिखाकर सुखा देना चाहिए।
मधुमक्खी पालन व बॉक्स का प्रबंध कैसे करें
बॉक्स का निरीक्षण हर 5 से 7 दिनों के पश्चात करना अति आवश्यक है।निरीक्षण के दौरान मुंह पर जाली व दास्तानो का प्रयोग किया जाता है।उस समय हल्का धुआं भी करते हैं।जिसमें मधुमक्खियाँ, शांत बनी रहती हैं।
मधुमक्खी निरीक्षण करना
मधुखंड के निरीक्षण के समय यह देखते हैं कि किन- किन छतों में शहद है।जिन छतों में शहद 75-80 प्रतिशत तक जमा है, उस छते को निकाल कर उसकी मधुमक्खियाँ बॉक्स में ही झाड़ देते हैं।इसके पश्चात जमा शहद को चाकू से खरोंच कर शहद निकालने की मशीन द्वारा शहद निकाल लेते हैं व खाली फ्रेम को पुन: बॉक्स में लगा देते हैं।
बच्चों का निरीक्षण
बच्चों के निरीक्षण में सर्वप्रथम रानी मक्खी को पहचान कर उसकी अवस्था का जायजा लिया जाता है।यदि रानी बूढ़ी हो गई हो या चोटिल हो तो उसके स्थान पर नई रानी मक्खी प्रवेश कराई जाती है।नर मधुमक्खी का रंग काला होता है, यह केवल प्रजनन के काम आती है इसलिए इनके निरिक्षण की विशेष आवश्यकता नहीं होती है।चौखटों के मध्य भाग में पराग व मकरंद होता है।
स्थान परिवर्तन व पेकिंग निरीक्षण
फसल चक्र में परिवर्तन के साथ मधुमक्खियों को पराग व मकरंद का आभाव होने लगता है।इस स्थिति में बॉक्स का स्थानांतरण ऐसे स्थानों पर किया जाता है जहाँ विभिन्न फूलों व फलों वाली फसलें प्रचुरता में उपलब्ध हों।स्थानांतरण हेतु पैकिंग कार्य के शाम के समय किया जाता है, जिससे सभी श्रमिक मक्खियाँ अपने बॉक्स में वापस आ जाएँ।निरीक्षण के दौरान यह देखा जाना चाहिए कि वहाँ पराग व मकरंद उपयुक्त मात्रा में है या नहीं, इसमें कमी होने पर चीनी व घोल प्रदान किया जाता है।
पर्याप्त मात्रा में पराग व मकरंद प्राप्त होने पर बॉक्स में भी वृद्धि अधिक होती है।इस प्रकार हुई वंश वृद्धि की व्यवस्था दो प्रकार से की जाती है।बॉक्स से नए छत्ते बनवाकर व बॉक्स का विभाजन करके।
शहद निकालना
बॉक्स में स्थित छतों में जब 75 से 80 प्रतिशत तक तक शहद जमा हो जाए तो उस शहद का निकाला जाता है।इसके लिए सबसे पहले छत्तों से मधुमक्खियाँ झाड़करबॉक्स में डाल देते हैं इसके पश्चात चाकू से या तेज गर्म पानी डालकर छत्ते से मोम की ऊपरी परत उतारते हैं।फिर इस छते को शहद निष्कासन यंत्र में रखकर हैंडिल द्वारा घुमाते हैं, इसमें अपकेन्द्रिय बल द्वारा शहद बाहर निकल जाता है व छत्ते की संरचना को भी कोई नुकसान नहीं पहूंचता।इस छते को फिर से बॉक्स में लगा दिया जाता है एवं मधुमक्खियाँ छत्ते के टूटे हुए भागों को ठीक करके पुन: शहद भरना प्रारंभ कर देती हैं।इस प्रकार प्राप्त शहद को मशीन से निकाल कर एक टंकी में 2 दिन तक डाल देते हैं।
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