शव जलने के बाद आत्मा के साथ क्या होता है? गरुण पुराण।।
Автор: Sanatan Yatra
Загружено: 2026-01-01
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📜 डिस्क्रिप्शन (गरुड़ पुराण के अनुसार)
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब मनुष्य के शरीर का दाह-संस्कार (शव जलना) हो जाता है, तब आत्मा शरीर से पूर्णतः अलग हो जाती है। शरीर पंचतत्वों में विलीन हो जाता है, लेकिन आत्मा अपनी सूक्ष्म देह के साथ यात्रा आरंभ करती है।
मृत्यु के बाद आत्मा लगभग 13 दिनों तक प्रेत अवस्था में रहती है। इस समय वह अपने परिजनों, घर और किए गए कर्मों को देखती है। इसी कारण हिंदू धर्म में पिंडदान, तेरहवीं और श्राद्ध जैसे संस्कार किए जाते हैं, ताकि आत्मा को शांति मिले और उसकी आगे की यात्रा सुगम हो।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आत्मा को उसके कर्मों के अनुसार यमलोक की यात्रा करनी पड़ती है। अच्छे कर्म करने वाली आत्मा को सुखद मार्ग मिलता है, जबकि बुरे कर्मों के कारण आत्मा को कष्टदायक मार्गों से गुजरना पड़ता है। अंततः आत्मा को उसके कर्मफल के अनुसार स्वर्ग, नरक या पुनर्जन्म प्राप्त होता है।
यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि जीवन में अच्छे कर्म, सत्य और धर्म का पालन करना ही मृत्यु के बाद की यात्रा को शांतिपूर्ण बनाता है।
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